अयूब 14:1-21 CGOCV2024 - Bible AI

1“मनखेमन माईलोगन ले जनमथें,

2ओमन फूल कस फूलथें, अऊ फेर मुरझा जाथें;

3का तेंह ओमन ऊपर अपन नजर डारबे?

4कोन ह असुध चीज म ले सुध चीज ला निकाल सकत हे?

5मनखे के उमर के दिनमन ला निस्चित करे गे हवय;

6एकरसेति जब तक ओह बनिहार कस अपन समय ला पूरा नइं कर लेवय,

7“एक रूख बर कम से कम ये आसा रहिथे:

8चाहे येकर जरीमन भुइयां म जुन्ना हो जावंय

9तभो ले पानी के गंध पाके येह उलहोही

10पर मनखे ह मर जाथे अऊ खाल्हे म परे रहिथे;

11जइसने झील के पानी ह घट जाथे

12वइसने ही मनखे ह लेटथे अऊ फेर नइं उठय;

13“कास! तेंह मोला कबर म लुकाके रखते

14कहूं कोनो मनखे ह मर जावय, त का ओह फेर जीही?

15तेंह मोला बलाबे अऊ मेंह तोला जबाब दूहूं;

16खचित तब तेंह मोर कदम ला गनबे

17मोर अपराधमन थैली म मुहरबंद करे जाहीं;

18“पर जइसे पहाड़ ह गिरथे अऊ चूर-चूर हो जाथे

19जइसे पानी ह पथरामन ला घीस डारथे

20तेंह ओमन ला हमेसा बर हरा देथस, अऊ ओमन चल देथें;

21यदि ओमन के लइकामन के सम्मान करे जाथे, त ओमन येला नइं जानंय;

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