1“मनखेमन माईलोगन ले जनमथें,
2ओमन फूल कस फूलथें, अऊ फेर मुरझा जाथें;
3का तेंह ओमन ऊपर अपन नजर डारबे?
4कोन ह असुध चीज म ले सुध चीज ला निकाल सकत हे?
5मनखे के उमर के दिनमन ला निस्चित करे गे हवय;
6एकरसेति जब तक ओह बनिहार कस अपन समय ला पूरा नइं कर लेवय,
7“एक रूख बर कम से कम ये आसा रहिथे:
8चाहे येकर जरीमन भुइयां म जुन्ना हो जावंय
9तभो ले पानी के गंध पाके येह उलहोही
10पर मनखे ह मर जाथे अऊ खाल्हे म परे रहिथे;
11जइसने झील के पानी ह घट जाथे
12वइसने ही मनखे ह लेटथे अऊ फेर नइं उठय;
13“कास! तेंह मोला कबर म लुकाके रखते
14कहूं कोनो मनखे ह मर जावय, त का ओह फेर जीही?
15तेंह मोला बलाबे अऊ मेंह तोला जबाब दूहूं;
16खचित तब तेंह मोर कदम ला गनबे
17मोर अपराधमन थैली म मुहरबंद करे जाहीं;
18“पर जइसे पहाड़ ह गिरथे अऊ चूर-चूर हो जाथे
19जइसे पानी ह पथरामन ला घीस डारथे
20तेंह ओमन ला हमेसा बर हरा देथस, अऊ ओमन चल देथें;
21यदि ओमन के लइकामन के सम्मान करे जाथे, त ओमन येला नइं जानंय;