अयूब 16:1-21 CGOCV2024 - Bible AI

1तब अयूब ह जबाब दीस:

2“मेंह ये किसम के बहुंत गोठ सुन चुके हंव;

3का तुम्हर बेकार के लम्बा भासन कभू खतम नइं होवय?

4मेंह घलो तुम्हर सहीं गोठियातेंव,

5पर मोर बचन ह तुमन ला उत्साहित करतिस;

6“कहूं मेंह गोठियावंव, तभो ले मोर पीरा ह कम नइं होवय;

7सही म, हे परमेसर, तेंह मोला थको दे हस;

8तेंह मोला सूखा डारे हस—अऊ येह एक गवाह बन गे हवय;

9परमेसर ह मोर ऊपर वार करथे अऊ अपन रिस म मोला चीर डारथे

10मनखेमन मोला ताना मारथें;

11परमेसर ह मोला भक्तिहीन मनखेमन के बस म कर दे हवय

12मोर संग सब ठीक रिहिस, पर ओह मोला चकनाचूर कर दीस;

13ओकर धनुसधारीमन मोला चारों कोति ले घेरे हवंय।

14बार-बार ओकर गुस्सा ह मोर ऊपर फूटथे;

15“मेंह दुख के सेति अपन खाल ऊपर बोरा ला सील ले हवंव

16रो-रोके मोर चेहरा ह लाल हो गे हवय,

17तभो ले मेंह कोनो हिंसा के काम नइं करे हवंव

18“हे धरती! मोर लहू ला झन ढांप;

19अभी घलो स्वरग म मोर गवाह हवय;

20मोर संगीमन मोर निन्दा करइया अंय;

21एक मनखे कोति ले ओह परमेसर ले बिनती करथे

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