अयूब 17:1-15 CGOCV2024 - Bible AI

1मोर मन ह टूट गे हवय,

2खचित ठट्ठा करइयामन मोर चारों कोति हवंय;

3“हे परमेसर, मोला छोंड़ाय बर जमानत दे।

4तेंह ओमन के समझ के सक्ति ला बंद कर दे हवस;

5कहूं कोनो अपन लाभ बर अपन संगीमन के चारी-चुगली करथे,

6“परमेसर ह मोला जम्मो झन बर एक कहावत बना दे हवय,

7मोर आंखीमन दुख के कारन धुंधला गे हवंय;

8सीधवा मनखेमन येला देखके अचम्भो करथें;

9तभो ले, धरमीमन अपन रद्दा ला धरे रहिहीं,

10“पर आवव, तुमन जम्मो झन, फेर कोसिस करव!

11मोर जीये के दिनमन तो बीत गीन, मोर योजनामन छितिर-बितिर हो गे हवंय।

12ओमन रथिया ला दिन म बदल देथें;+ 17:12 या सच ला झूठ म बदल देथें*

13कहूं मेंह कोनो घर के आसा करंव, त ओह सिरिप कबर अय,

14कहूं मेंह भ्रस्ट काम ला कहंव, ‘तें मोर ददा अस,’

15त फेर मोर आसा कहां हवय—

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