अयूब 19:1-28 CGOCV2024 - Bible AI

1तब अयूब ह जबाब दीस:

2“तुमन मोला कब तक दुख देवत रहिहू

3दस बार अब तुमन मोर निन्दा कर चुके हव;

4कहूं येह सच अय कि मेंह सही रसता ले भटक गे हवंव,

5कहूं तुमन सिरतों अपनआप ला मोर ले ऊपर करहू

6त येला जान लेवव कि परमेसर ह मोला गलत ठहिराय हवय

7“हालाकि मेंह चिचियाके कहिथंव, ‘उपदरव!’ पर मोला कोनो जबाब नइं मिलय;

8परमेसर ह मोला रोके बर रद्दा ला रूंध देय हवय कि मेंह नाहकके झन जा सकंव;

9ओह मोर आदरमान ला लेय ले हवय

10ओह मोला चारों कोति ले चीर डारथे, जब तक कि मेंह खतम नइं हो जावंव;

11ओकर रिस ह मोर बिरोध म भड़कथे;

12ओकर सेनामन ताकत के संग आघू बढ़थें;

13“ओह मोर भाईमन ला मोर ले दूरिहा कर दे हवय;

14मोर रिस्तेदारमन मोला छोंड़ दे हवंय;

15मोर पहुना अऊ मोर दासीमन मोला परदेसी समझथें;

16मेंह अपन सेवक ला बलाथंव, पर ओह जबाब नइं देवय,

17मोर सांस ह मोर घरवाली ला बने नइं लगय;

18अऊ त अऊ नानकून लइकामन घलो मोर हंसी उड़ाथें;

19मोर जम्मो नजदीकी संगी-साथीमन मोर ले घिन करथें;

20मेंह सिरिप चमड़ी अऊ हाड़ा के छोंड़ अऊ कुछू नो हंव;

21“मोर ऊपर दया करव, हे मोर संगीमन, दया करव,

22तुमन परमेसर के सहीं काबर मोर पाछू पड़े हवव?

23“कास, मोर गोठमन ला लिखे जातिस,

24कास, ओमन सीसा म लोहा के कलम ले लिखे जातिन,

25मेंह जानत हंव कि मोला कैद ले छुड़इया ह जीयत हवय,

26अऊ मोर चमड़ी के नास हो जाय के पाछू घलो,

27मेंह खुद ओला देखहूं

28“कहूं तुमन कहत हव, ‘हमन ओला कइसे सताबो,

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