1फेर एक आने दिन स्वरगदूतमन+ 2:1 इबरानी म परमेसर के बेटामन* यहोवा करा आईन, अऊ सैतान घलो ओमन के संग म यहोवा करा आईस।
2तब यहोवा ह सैतान ला पुछिस, “तें कहां ले आवत हस?”
3तब यहोवा ह सैतान ला कहिस, “का तेंह मोर दास अयूब के ऊपर धियान देय हवस? धरती म ओकर सहीं कोनो नइं ए; ओह बिगर दोस के अऊ ईमानदार मनखे अय अऊ ओह परमेसर के भय आदर के साथ मानथे अऊ बुरई ले दूरिहा रहिथे। हालाकि तेंह ओला बिगर कोनो कारन के नास करे बर मोला ओकर बिरोध म उकसाय हस, तभो ले ओह अब तक ईमानदार बने हवय।”
4सैतान ह जबाब दीस, “खाल के बलदा म खाल! परान के बलदा म मनखे ह अपन जम्मो कुछू ला दे देथे।
5पर अब तेंह अपन हांथ बढ़ाके ओकर मांस अऊ हाड़ामन ला मार, अऊ ओह खचित तोर मुहूं म तोर निन्दा करही।”
6यहोवा ह सैतान ला कहिस, “ठीक हे, अब ओह तोर अधिकार म हवय, पर तें ओकर परान ला सुरकछित रहन देबे।”
7तब सैतान ह यहोवा करा ले चल दीस अऊ ओह अयूब के पांव के तरी ले लेके मुड़ के टीप तक पीरा देवइया फोड़ा निकालके दुख दीस।
8तब अयूब ह माटी के घघरी के एक ठन टुकड़ा लीस अऊ राख म बईठके ओ टुकड़ा ले अपनआप ला खुजीयाय लगिस।
9तब ओकर घरवाली ह ओला कहिस, “का तेंह अभी घलो अपन ईमानदारी ला धरे हस? परमेसर के निन्दा कर अऊ मर जा!”
10अयूब ह ओला जबाब दीस, “तेंह मुरूख माईलोगन सहीं गोठियावत हस। का हमन परमेसर ले सिरिप बने चीजमन ला लेवन, अऊ समस्या ला नइं लेवन?”
11जब अयूब के तीन झन संगी तेमानी के रहइया एलीपज, सूही के रहइया बिलदद अऊ नामाती के रहइया सोपर, अयूब के ऊपर आय ओ जम्मो समस्या के बारे म सुनिन, त ओमन अपन-अपन घर ले निकलिन अऊ एक संग मिलके ये निरनय करिन कि हमन ओकर करा जाके ओला सहानुभूति अऊ सांतवना देबो।
12जब ओमन थोरकन दूरिहा ले ओला देखिन, त ओला नइं चिन सकिन; ओमन चिचिया-चिचियाके रोय लगिन, अऊ अपन दुख परगट करके ओनहा ला चीरिन अऊ ऊपर कोति धुर्रा उड़ियाके अपन-अपन मुड़ म डारे लगिन।