अयूब 22:1-29 CGOCV2024 - Bible AI

1तब तेमान के रहइया एलीपज ह जबाब दीस:

2“का कोनो मनखे ले परमेसर ला फायदा हो सकथे?

3यदि तेंह धरमी होते, त एकर ले सर्वसक्तिमान ला का खुसी मिलतिस?

4“का ओह तोर भक्ति के कारन तोला दबकारथे

5का तोर दुस्टता बहुंत नइं हो गे हवय?

6तेंह बिगर कोनो कारन के अपन रिस्तेदारमन ले सुरकछा मांगय;

7तेंह थके-मांदे मनखे ला पानी नइं पीयाय

8हालाकि तेंह एक सामर्थी मनखे रहय अऊ तोर करा जमीन-बारी रिहिस—

9अऊ तेंह बिधवामन ला खाली हांथ लहुंटा देय

10एकरसेति तोर चारों कोति फांदामन हवंय,

11अऊ अइसे अंधियार हवय कि तेंह देख नइं सकस,

12“का परमेसर ह स्वरग के ऊंचई म नइं ए?

13तभो ले तेंह कहिथस, ‘परमेसर ह का जानथे?

14बादरमन ओकर आघू म परदा डार देथें, जेकर ले ओह हमन ला नइं देखय

15का तेंह ओ जुन्ना डहार ला धरे रहिबे

16ओमन ला ओमन के समय ले पहिली उठा लिये गीस,+ 22:16 या समय के पहिली मिरतू हो गीस*

17ओमन परमेसर ला कहिन, ‘हमन ला अकेला छोंड़ दे!

18तभो ले ओही ह ओमन के घर ला बढ़िया चीजमन ले भर दीस,

19धरमीमन ओमन के बिनास ला देखथें अऊ आनंद मनाथें;

20‘खचित, हमर बिरोधीमन नास होवथें

21“अपनआप ला परमेसर ला दे अऊ ओकर संग सांति बनाय रख;

22ओकर निरदेस ला मान

23कहूं तेंह सर्वसक्तिमान करा लहुंटके आबे, त तेंह पहिली के सहीं हो जाबे:

24अऊ अपन सोन, धुर्रा ला,

25त सर्वसक्तिमान ह तोर बर सोन,

26खचित, तब तें सर्वसक्तिमान म खुसी पाबे

27तेंह ओकर ले पराथना करबे, अऊ ओह तोर सुनही,

28जऊन कुछू करे बर तेंह ठान लेबे, ओह तोर बर पूरा हो जाही,

29जब मनखेमन के बेजत्ती करे जाथे अऊ तेंह कहिथस, ‘ओमन के आदर करव!’

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