1“सर्वसक्तिमान परमेसर ह नियाय के समय ला काबर नइं ठहिरात हे?
2कुछू मनखेमन भुइयां के सिवाना ला बढ़ा देथें;
3ओमन अनाथमन के गदहा ला खेदके ले जाथें
4ओमन जरूरतमंद मनखे ला रद्दा ले ढकेल देथें
5सुन्ना जगह म जंगली गदहामन कस,
6ओमन खेत म फसल संकेलथें
7ओमन बिगर ओनहा के नंगरा रथिया बिताथें;
8ओमन परबत के बरसा ले भीग जाथें
9अनाथ लइका ला दूध पीयावत दाई के छाती ले छीन लेथें;
10ओनहा के कमी के कारन, ओमन नंगरा रहिथें;
11ओमन चबूतरामन+ 24:11 इबरानी म ये सबद के मतलब साफ नइं ए* म जैतून तेल पेरथें;
12सहर ले मरइयामन के कलहरई ह सुनई देथे,
13“अइसने मनखे हवंय, जऊन मन अंजोर के बिरोध म बिदरोह करथें,
14जब दिन के अंजोर ह चले जाथे, त हतियारा ह ठाढ़ होथे,
15बेभिचार करइया के आंखी ह संझाती के डहार देखथे;
16अंधियार म चोरमन घर म सेंध लगाथें,
17ओ जम्मो बर, आधा रथिया ह ओमन के बिहनियां ए;
18“तभो ले ओमन पानी के ऊपर झाग सहीं अंय;
19जइसे कि गरमी अऊ सूखा ह पिघलत बरफ के पानी ला ले जाथे,
20दाई ह ओमन ला भुला जाथे,
21ओमन ठड़गी अऊ बिगर लइका के माईलोगनमन ला लूटथें,
22पर परमेसर ह अपन सामर्थ ले सूरबीरमन ला घिल्लावत ले जाथे;
23परमेसर ह ओमन ला सुरकछा के अनुभव म अराम करा सकथे,
24ओमन थोरकून समय बर ऊपर उठाय जाथें, अऊ ओकर बाद ओमन के कुछू महत्व नइं रहय;