अयूब 26:1-14 CGOCV2024 - Bible AI

1तब अयूब ह जबाब दीस:

2“तेंह कइसे निरबलमन के मदद करे हवस! तेंह कइसे ओ मनखे ला संभाले हस, जऊन ह कमजोर हवय!

3तेंह ओ मनखे ला का सलाह दे हवस, जेकर करा बुद्धि नइं ए! अऊ तेंह का अंतर-गियान देखाय हवस!

4कोन ह तोला ये गोठ कहे बर मदद करे हवय? अऊ काकर आतमा ह तोर मुहूं ले गोठियाईस?

5“मरे मनखेमन बहुंत पीरा म हवंय, ओमन, जऊन मन पानी के खाल्हे अऊ ओ जम्मो, जऊन मन ओमा रहिथंय।

6अधोलोक ह परमेसर के आघू म खुला हवय; बिनास ह नइं तोपाय हवय।

7ओह उत्तर दिग के अकासमन ला खाली जगह म बगराथे; ओह धरती ला अधर म लटकाय हवय।

8ओह बारिस के पानी ला अपन बादर म लपेटे हवय, तभो ले बादरमन ओमन के बोझ म होके बरसंय नइं।

9ओह पून्नी के चंदा ला ढांप देथे, ओकर ऊपर अपन बादरमन ला बगराय के दुवारा।

10अंजोर अऊ अंधियार के बीच म सिवाना बांधे बर ओह समुंदर के सतह म छितिज ला ठहिराय हवय।

11ओकर दबकारे ले अकास के खंभामन डरके थर-थर कांपथें।

12अपन सामर्थ ले ओह समुंदर ला सांत कर देथे; अपन बुद्धि ले ओह राहाब+ 26:12 राहाब के मतलब पुराना जमाना के काल्पनिक समुंदर के अस्सूर ला कुटा-कुटा कर देथे।

13ओकर सांस ले अकास-मंडल साफ हो जाथे; ओकर हांथ ह भागत सांप ला मार देथे।

14अऊ येमन तो ओकर काम के सिरिप एक झलक अंय; ओकर फुसफुसाहट हमन ला कतेक कम सुनई देथे! त फेर ओकर सामर्थ के गरजन ला कोन ह समझ सकथे?”

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