अयूब 30:1-30 CGOCV2024 - Bible AI

1“पर अब ओमन ही मोर हंसी उड़ाथें,

2ओमन के भुजा के बल ह मोर का काम के रिहिस,

3गरीबी अऊ भूख ले दुबर-पातर,

4ओमन झाड़ी के बीच म लोनिया साग+ 30:4 या नूनचूर भुइयां (ऊसर भुइयां) म उपजे साग-भाजी* टोरिन,

5ओमन ला समाज ले निकाल देय गे रिहिस,

6ओमन ला डरावनी घाटीमन म, चट्टानमन के बीच म

7ओमन झाड़ीमन के बीच म पसु सहीं चिचियावंय

8ओमन नीच अऊ अनामी संतान रिहिन,

9“अब ओ जवानमन गीत गाके मोर हंसी उड़ाथें;

10ओमन मोर ले घिन करथें अऊ मोर ले दूरिहा रहिथें;

11काबरकि परमेसर ह मोला सक्तिहीन कर दे हवय अऊ मोला पीरा दे हवय,

12मोर जेवनी कोति बरदी के बरदी चढ़ई करथें;

13ओमन मोर डहार ला काटके बंद कर देथें;

14दरार म ले बुलकके आय सहीं ओमन आघू बढ़थें;

15आतंक ह मोर ऊपर छा गे हवय;

16“अब मोर जिनगी ह घटत हवय;

17रथिया ह मोर हाड़ामन ला भेद देथे;

18परमेसर ह अपन बड़े सामर्थ म मोर ओनहा ला पकड़थे+ 30:18 या परमेसर ह गुस्सा म मोर ओनहा ला पकड़थे*;

19ओह मोला चीखला म फटिकथे,

20“हे परमेसर, में तोला पुकारथंव, पर तेंह जबाब नइं देवस;

21तें मोर बर कठोर हो गे हस;

22तेंह मोला उठाके हवा म उड़िया देथस;

23मेंह जानत हंव तेंह मोला मिरतू करा ले आबे,

24“खचित कोनो टूटे मनखे कोति हांथ नइं बढ़ावय

25का मेंह ओमन बर नइं रोयेंव, जऊन मन समस्या म रिहिन?

26तभो ले जब मेंह भलई के आसा करेंव, त बुरई ह आईस;

27मोर भीतर म उथल-पुथल कभू बंद नइं होवय;

28मेंह करिया होवत हंव, पर सूरज के दुवारा नइं;

29मेंह गीदड़मन के भाई,

30मोर चमड़ी ह करिया होके गिरत हवय;

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