1“पर अब ओमन ही मोर हंसी उड़ाथें,
2ओमन के भुजा के बल ह मोर का काम के रिहिस,
3गरीबी अऊ भूख ले दुबर-पातर,
4ओमन झाड़ी के बीच म लोनिया साग+ 30:4 या नूनचूर भुइयां (ऊसर भुइयां) म उपजे साग-भाजी* टोरिन,
5ओमन ला समाज ले निकाल देय गे रिहिस,
6ओमन ला डरावनी घाटीमन म, चट्टानमन के बीच म
7ओमन झाड़ीमन के बीच म पसु सहीं चिचियावंय
8ओमन नीच अऊ अनामी संतान रिहिन,
9“अब ओ जवानमन गीत गाके मोर हंसी उड़ाथें;
10ओमन मोर ले घिन करथें अऊ मोर ले दूरिहा रहिथें;
11काबरकि परमेसर ह मोला सक्तिहीन कर दे हवय अऊ मोला पीरा दे हवय,
12मोर जेवनी कोति बरदी के बरदी चढ़ई करथें;
13ओमन मोर डहार ला काटके बंद कर देथें;
14दरार म ले बुलकके आय सहीं ओमन आघू बढ़थें;
15आतंक ह मोर ऊपर छा गे हवय;
16“अब मोर जिनगी ह घटत हवय;
17रथिया ह मोर हाड़ामन ला भेद देथे;
18परमेसर ह अपन बड़े सामर्थ म मोर ओनहा ला पकड़थे+ 30:18 या परमेसर ह गुस्सा म मोर ओनहा ला पकड़थे*;
19ओह मोला चीखला म फटिकथे,
20“हे परमेसर, में तोला पुकारथंव, पर तेंह जबाब नइं देवस;
21तें मोर बर कठोर हो गे हस;
22तेंह मोला उठाके हवा म उड़िया देथस;
23मेंह जानत हंव तेंह मोला मिरतू करा ले आबे,
24“खचित कोनो टूटे मनखे कोति हांथ नइं बढ़ावय
25का मेंह ओमन बर नइं रोयेंव, जऊन मन समस्या म रिहिन?
26तभो ले जब मेंह भलई के आसा करेंव, त बुरई ह आईस;
27मोर भीतर म उथल-पुथल कभू बंद नइं होवय;
28मेंह करिया होवत हंव, पर सूरज के दुवारा नइं;
29मेंह गीदड़मन के भाई,
30मोर चमड़ी ह करिया होके गिरत हवय;