अयूब 33:1-32 CGOCV2024 - Bible AI

1“पर अब, हे अयूब, मोर गोठ ला सुन;

2मेंह अपन मुहूं खोलनेचवाला हंव;

3मोर गोठ ह सही मन ले आवत हे;

4परमेसर के आतमा ह मोला बनाय हवय;

5कहूं जबाब दे सकत हस, त दे;

6परमेसर के नजर म तोरेच कस महूं घलो अंव;

7मोर ले तोला कोनो किसम के डर झन होवय,

8“पर तेंह मोर सुनत म कहे हस—

9‘मेंह सुध हंव, मेंह कोनो अपराध नइं करे हंव;

10तभो ले परमेसर ह मोर म गलती पाय हे;

11ओह मोर गोड़ ला बेड़ी म बांधथे;

12“पर मेंह तोला कहत हंव कि ये बात म तेंह सही नो हस,

13तेंह ओकर करा काबर सिकायत करथस

14काबरकि परमेसर ह गोठियाथे जरूर—कभू एक रीति ले, त कभू आने रीति ले—

15कभू सपना म, कभू रथिया दरसन म,

16त परमेसर ह ओमन के कान म गोठियाथे

17ताकि ओमन गलत काम झन करंय

18ताकि ओमन खंचवा म गिरे ले बचंय,

19“या कोनो मनखे अपन बिस्तर म पीरा ले पीड़ित हे,

20जेकर ले जेवन ह ओकर मन ला नइं रूचय

21ओकर देहें के मांस ह बेकार म नास होथे,

22ओकर जीव खंचवा के लकठा म जाथे,

23कहूं एक स्वरगदूत ह ओकर कोति रहय

24अऊ ओह ओ मनखे ऊपर दयालु बनके परमेसर ले कहय,

25ओकर मांस ह लइका के मांस सहीं कोमल हो जावय

26तब ओ मनखे ह परमेसर ले पराथना करय अऊ परमेसर के अनुग्रह ला पावय,

27अऊ ओह आने मनखेमन करा जाके कहिही,

28परमेसर ह मोला कबर म जाय ले बचाय हवय,

29“परमेसर ह ये जम्मो चीज मनखे के संग करथे—

30ताकि ओमन कबर ले लहुंटंय,

31“हे अयूब, धियान दे, अऊ मोर बात ला सुन;

32कहूं तोला कुछू कहना हे, त मोला जबाब दे;

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