अयूब 34:1-36 CGOCV2024 - Bible AI

1तब एलीहू ह आगे कहिस:

2“हे बुद्धिमान मनखेमन, मोर बात ला सुनव;

3काबरकि जइसे जीभ ले जेवन चखे जाथे,

4सही का ए, आवव, हमन ओला समझन;

5“काबरकि अयूब ह ये कहिथे, ‘मेंह निरदोस अंव,

6हालाकि मेंह सही अंव,

7का कोनो अयूब कस हवय,

8ओह कुकरमीमन के संग म रहिथे;

9काबरकि ओह कहिथे, ‘परमेसर ला खुस करे के

10“एकरसेति, हे समझदार मनखेमन, मोर बात सुनव।

11ओह हर कोनो ला ओमन के काम के मुताबिक फर देथे;

12ये सोचे घलो नइं जा सकय कि परमेसर ह गलत करही,

13कोन ह ओला धरती ऊपर नियुक्त करे हवय?

14कहूं येह ओकर इरादा होतिस

15त जम्मो मानव-जाति एक संग नास हो जातिस

16“कहूं तोर म समझ हवय, त सुन;

17जऊन ह नियाय के बईरी ए, का ओह सासन कर सकथे?

18का येह ओ नो हय, जऊन ह राजामन ला कहिथे, ‘तुमन निकम्मा अव,’

19परमेसर ह राजकुमारमन के तरफदारी नइं करय

20ओमन छिन भर म, आधा रथिया के मर जाथें;

21“परमेसर के आंखी ह मनखे के चालचलन के ऊपर लगे रहिथे;

22अइसे कोनो घोर अंधियार या घिटके अंधियार नइं ए,

23परमेसर बर मनखेमन ला अऊ परखना जरूरी नो हय,

24बिगर छानबीन करे ओह बलवानमन ला चूर-चूर करथे

25काबरकि ओह ओमन के करनी ला जानथे,

26ओह ओमन ला ओमन के दुस्टता के सजा उहां देथे

27काबरकि ओमन ओकर पाछू रेंगई ला छोंड़ दे हवंय

28ओमन के कारन गरीबमन के गोहार ह परमेसर करा हबरिस,

29पर कहूं ओह चुप रहय, त कोन ह ओला दोसी ठहिरा सकत हे?

30ताकि भक्तिहीन मनखे ह राज झन करय

31“मान लव, कोनो मनखे परमेसर ला कहिथे,

32जऊन ला मेंह नइं देख सकंव, तेंह मोला ओ बात सिखा;

33त का परमेसर ह तोर सर्त के मुताबिक तोला परतिफल दीही,

34“समझदार मनखेमन बताथें,

35‘अयूब ह बिगर गियान के गोठियाथे;

36बने होतिस, कि अयूब ह आखिरी तक परखे जातिस

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