अयूब 36:1-32 CGOCV2024 - Bible AI

1फेर एलीहू ह ये घलो कहिस:

2“थोरकून अऊ धीरज धर, त मेंह तोला देखाहूं

3मेंह अपन गियान बहुंत दूरिहा ले पाथंव;

4खचित मोर गोठ ह लबारी नो हय;

5“परमेसर ह सक्तिमान ए, पर ओह कोनो मनखे ला तुछ नइं जानय;

6ओह दुस्ट ला जीयत नइं रहन देवय

7ओह धरमीमन ले अपन नजर नइं हटावय;

8पर कहूं मनखेमन बेड़ी म बंधाय हवंय,

9त ओह ओमन ला बताथे कि ओमन का करे हवंय—

10ओह ओमन ला सुधारे खातिर सुनाथे

11कहूं ओमन हुकूम मानंय अऊ ओकर सेवा करंय,

12पर कहूं ओमन नइं सुनंय,

13“भक्तिहीनमन अपन दिल म कोरोध पालथें;

14ओमन देवालय के पुरूस बेस्यामन+ 36:14 धारमिक बेस्या के काम, जेला राजामन के किताब म गलत कहे गे हवय; येह कनानीमन के धारमिक काम रिहिस* के बीच

15पर परमेसर ह दुखी मनखेमन ला ओमन के दुख ले छुड़ाथे;

16“ओह तोला बिपत्ति के मुहूं ले निकालके

17पर अब तोला ओ दंड दिये जावत हे, जऊन ह दुस्टमन बर अय;

18सचेत रह कि कोनो तोला धन-संपत्ति के दुवारा झन बहकावय;

19का तोर जम्मो धन-संपत्ति अऊ तोर जम्मो बल

20ओ रथिया के आसा झन कर,

21सचेत रह अऊ बुरई कोति झन लहुंट,

22“परमेसर ह अपन सामर्थ म अति महान अय।

23कोन ह ओकर बर डहार ठहिराय हवय,

24ओकर काम के परसंसा करे बर झन भुला;

25जम्मो मानव-जाति ह येला देखे हवय;

26परमेसर ह कतेक महान ए—हमर समझ के बाहिर ए!

27“ओह पानी के बूंदमन ला ऊपर खींच लेथे,

28बादरमन अपन नमी ला खाल्हे उंडेलथें

29कोन ह समझ सकथे कि ओह बादरमन ला कइसे बगराथे,

30देखव, ओह कइसे चारों कोति अपन बिजली ला चमकाथे,

31ये किसम ले ओह देस-देस के मनखेमन ऊपर सासन करथे+ 36:31 या पालथे-पोसथे*

32ओह बिजली ला अपन हांथ म ले लेथे

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