अयूब 37:1-23 CGOCV2024 - Bible AI

1“इही बात म मोर हिरदय ह कांपथे

2सुन! परमेसर के अवाज के गरजन,

3ओह अपन बिजली ला जम्मो अकास के खाल्हे जावन देथे

4ओकर बाद ओकर गरजन के अवाज आथे;

5परमेसर के अवाज ह अद्भूत रीति ले गरजथे;

6ओह बरफ ला हुकूम देथे, ‘धरती म गिर,’

7ताकि हर एक मनखे, जऊन ला ओह बनाय हे, ओकर काम ला जानय,

8तब बन के पसुमन अपन गुफा म खुसर जाथें;

9अपन छेत्र+ 37:9 याने कि, दक्खिन दिग* ले आंधी,

10परमेसर के सांस फूंके ले बरफ बनथे,

11ओह बादरमन ला नमी ले लादथे;

12ओकर आदेस म येमन

13ओह मनखेमन ला दंड देय बर बादर लानथे,

14“हे अयूब, येला सुन;

15का तें जानथस कि परमेसर ह कइसे बादरमन ला अपन हुकूम ले चलाथे

16का तेंह जानथस कि बादरमन अधर म कइसे रहिथें,

17जब दक्खिन के हवा के कारन भुइयां ह सांत रहिथे,

18त का तेंह ओकर संग म अकास-मंडल ला तान सकत हस,

19“हमन ला बता कि हमन ओला का कहिबो;

20का ओला बताय जावय कि मेंह गोठियाय चाहत हंव?

21अभी तो सूरज कोति कोनो नइं देख सकंय,

22उत्तर कोति ले ओह सोन कस चमकत आथे;

23सर्वसक्तिमान ह हमर पहुंच के बाहिर ए अऊ बहुंत सामर्थी ए;

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