अयूब 39:1-29 CGOCV2024 - Bible AI

1“का तेंह जानथस कि पहाड़ के जंगली छेरीमन कब पीला देथें?

2का तेंह ओमन के गरभ धारन करे के महिनामन ला गनथस?

3ओमन निहरके अपन पीला ला जनमथें;

4ओमन के पीलामन जंगल म बाढ़थें अऊ मजबूत होवत जाथें;

5“कोन ह जंगली गदहामन ला खुला छोंड़ देथे?

6ओमन ला मेंह ओमन के घर बर सुन्ना जगह,

7ओमन तो सहर के कोलाहल ऊपर हांसथें;

8ओमन अपन चारा बर पहाड़मन म किंदरथें

9“का जंगली बईला ह तोर सेवा करे बर सहमती दीही?

10का तेंह जंगली बईला ला डोरी ले बांधके नांगर जोत सकथस?

11का तेंह ओकर बड़े बल के सेति ओकर ऊपर भरोसा करबे?

12का तेंह ओकर ऊपर भरोसा करबे कि ओह तोर अनाज ला लानय

13“सुतुरमुर्ग ह अपन डेनामन ला आनंद म फड़फड़ाथे,

14सुतुरमुर्ग ह तो अपन अंडा भुइयां म देथे

15ओला धियान नइं रहय कि ओमन काकरो गोड़ ले कुचरे जा सकथें,

16ओह अपन पीलामन ले कठोर बरताव करथे, मानो कि ओमन ओकर पीला नो हंय;

17काबरकि परमेसर ह ओला बुद्धि नइं देय हवय

18तभो ले जब ओह दऊड़े बर अपन डेना ला बगराथे,

19“का तेंह घोड़ा ला ओकर बल देथस

20का तेंह ओला फांफा कस उचके के बल देथस,

21ओह अपन बल ऊपर आनंद मनात, अपन खुर ले भुइयां ला खुरचथे,

22ओह बिगर कोनो भय के, डर के ऊपर हंसथे;

23तरकस ह अपन किनारा के बिरूध

24उत्तेजित होके रिस के मारे, ओह भुइयां ला छेदथे;

25तुरही के अवाज म ओह हिनहिनाथे, ‘अहा!’

26“का बाज चिरई ह तोर बुद्धि के दुवारा उड़थे

27का गिधवा ह तोर हुकूम ले बहुंत ऊपर म उड़थे

28ओह निकले चट्टान के चोटी म रहिथे अऊ उहां रात बिताथे;

29उहां ले ओह अपन जेवन के ताक म रहिथे;

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