अयूब 5:1-26 CGOCV2024 - Bible AI

1“यदि तोर ईछा हवय, त पुकार, पर तोला कोन जबाब दीही?

2तमकई ह तो मुरूख मनखे ला मार डारथे,

3मेंह खुद मुरूख मनखे ला बढ़त देखे हंव,

4ओकर लइकामन सुरकछित नइं एं,

5भूखहा मनखेमन ओकर फसल ला खा जाथें,

6काबरकि बिपत्ति ह माटी ले नइं उपजय,

7जइसे चिंगारीमन ऊपर कोति ही उड़थें,

8“पर यदि मेंह तोर स्थिति म होतेंव, त में परमेसर ले पराथना करतेंव;

9ओह अद्भूत काम करथे, जेला समझे नइं जा सकय

10ओह धरती म बारिस करथे;

11छोटे मनखेमन ला ओह ऊंचहा जगह म बईठारथे,

12ओह चतुरामन के योजना ला बिफल कर देथे,

13ओह बुद्धिमानमन ला ओहीचमन के चतुरई म फंसो देथे,

14दिन म ही ओमन के ऊपर अंधियार छा जाथे;

15ओह जरूरतमंद मनखेमन ला ओमन के बोली के चोखा तलवार ले बचाथे;

16एकरसेति गरीबमन ला आसा होथे,

17“धइन अय ओ मनखे, जऊन ला परमेसर ह सुधारथे;

18काबरकि ओह चोट पहुंचाथे, पर ओहीच ह पट्टी घलो बांधथे;

19छै बिपत्तिमन ले ओह तोला छोंड़ाही;

20दुकाल म ओह तोला मिरतू ले,

21तेंह जीभ ले निकले बचन के मार ले बचाय जाबे,

22तेंह बिनास अऊ दुकाल के बेरा म हंसबे,

23काबरकि मैदान के पथरामन संग तोर एक करार होही,

24तेंह जानबे कि तोर डेरा ह कुसल हवय;

25तेंह ये घलो जानबे कि तोर लइकामन अब्बड़ होहीं,

26जइसे कि समय म बीड़ा ला खरही गांजे जाथे,

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