अयूब 7:1-20 CGOCV2024 - Bible AI

1“का मनखेमन ला धरती म कठिन मेहनत नइं करे बर परय?

2जइसने एक गुलाम ह संझा के छइहां के ईछा करथे,

3वइसने ही मोला बेकार के महिनामन ला देय गे हवय,

4जब मेंह ढलंगथंव, त मेंह सोचथंव, ‘मेंह कब उठहूं?’

5मोर देहें म कीरा अऊ घाव ह माटी के परत ले ढंकाय हवय,

6“मोर दिनमन कोसटा के ढरकी ले घलो जादा तेज चलत हवंय,

7सुरता कर, हे परमेसर, मोर जिनगी ह सिरिप एक सांस अय;

8जऊन ह अभी मोला देखत हवय, ओकर आंखी ह मोला फेर नइं देखही;

9जइसने बादर ह छरियाके गायब हो जाथे,

10ओह अपन घर म फेर कभू नइं आही;

11“एकरसेति मेंह चुप नइं रहंव;

12का मेंह समुंदर अंव, या गहिरा पानी के बिकराल जन्तु,

13जब मेंह सोचथंव, मोर खटिया म मोला सांति मिलही

14तब घलो तें मोला सपना म डरवाथस

15एकरसेति मोर गला घोंटे जावय अऊ मोला मिरतू मिलय,

16मोला अपन जिनगी ले घिन आवथे; मेंह हमेसा जीयत नइं रहंव।

17“मनखे ह का ए कि तेंह ओला बहुंत महत्व देथस,

18अऊ तेंह रोज बिहनियां ओकर जांच करथस

19का तेंह कभू मोर देखभाल करई नइं छोंड़स,

20तेंह ओ अस, जऊन ह हमर हर एक काम ला देखत रहिथे,

Copyright © 2024 Biblica, Inc.
iv>