अयूब 8:1-21 CGOCV2024 - Bible AI

1तब सूही के रहइया बिलदद ह जबाब दीस:

2“तेंह कब तक अइसने बातमन ला कहत रहिबे?

3का परमेसर ह नियाय ला बिगाड़थे?

4जब तोर लइकामन परमेसर के बिरूध पाप करिन,

5पर यदि तेंह ईमानदारी ले परमेसर ला सहायता बर खोजबे,

6कहूं तेंह सुध अऊ धरमी अस,

7तोर सुरूआत ह छोटे जान पड़ही,

8“पिछला पीढ़ी के मनखेमन ले पुछ

9काबरकि हमन तो कल जनमे हन अऊ कुछू नइं जानन,

10जऊन मन हमर ले पहिले आईन, का ओमन तोला नइं सिखाहीं अऊ नइं बताहीं?

11जिहां दलदली भुइयां नइं ए, का उहां पपीरस पऊधा ह लम्बा बढ़ सकथे?

12ओमन बढ़ सकथें अऊ काटे घलो नइं गे रहंय,

13जऊन मन परमेसर ला बिसरा देथें, ओ जम्मो के हाल अइसने होथे;

14जेकर ऊपर ओमन भरोसा करथें, ओह कमजोर होथे;

15ओमन जाला के ऊपर आसरा करथें, पर ओह टूट जाथे;

16ओमन घाम म पानी पलोय गे पऊधा सहीं अंय,

17येह अपन जरीमन ला पथरा के कुढ़ा के चारों कोति लपेटथे

18कहूं येला अपन जगह ले उखान दिये जाथे,

19खचित, इही ह येकर जिनगी के अन्त अय,

20“खचित, परमेसर ह निरदोस मनखे ला अस्वीकार नइं करय

21ओह अब भी तोर मुहूं ला हंसी ले

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