1हमर कहे के सार बात ये अय: हमर करा एक अइसने महा पुरोहित हवय, जऊन ह स्वरग म महामहिम परमेसर के सिंघासन के जेवनी हांथ कोति जा बईठिस,
2अऊ ओह ओ पबितर-स्थान म सेवा करथे, जऊन ह सही के पबितर-तम्बू ए अऊ येह मनखे के दुवारा नइं, पर परभू के दुवारा खड़े करे गे हवय।
3हर एक महा पुरोहित ह भेंट अऊ बलिदान चघाय बर ठहिराय जाथे, एकरसेति ये महा पुरोहित बर घलो जरूरी रिहिस कि ओकर करा चघाय बर कुछू रहय।
4यदि ओह धरती म होतिस, त ओह एक पुरोहित नइं होतिस, काबरकि मूसा के कानून के मुताबिक भेंट चघाय बर पहिले से पुरोहितमन हवंय।
5जऊन सेवा ओमन पुरोहित के रूप म पबितर-स्थान म करथें, ओह ओकर एक नकल अऊ छइहां ए, जऊन ह स्वरग म हवय। एकरसेति जब मूसा ह पबितर-तम्बू ला बनइया रिहिस, त ओला ये चेतउनी मिले रिहिस: “धियान रहय कि जऊन नमूना तोला पहाड़ ऊपर देखाय गीस, ओकरे मुताबिक ही तेंह हर एक चीज ला बनाबे।”+ 8:5 निर 25:40*
6पर जऊन सेवकई यीसू ला मिले हवय, ओह अऊ उत्तम अय, जइसने कि ओ करार जेकर मध्यस्थ यीसू अय, जुन्ना करार ले अऊ उत्तम अय, काबरकि येह अऊ उत्तम परतिगियां ऊपर अधारित हवय।
7यदि पहिली करार म कुछू गलती नइं होतिस, त दूसर करार के जरूरत नइं होतिस।
8पर परमेसर ह मनखेमन ला दोसी पाईस अऊ कहिस:
9येह ओ करार सहीं नइं होही,
10ओ समय के बाद, मेंह इसरायल के मनखेमन संग ये करार करहूं,
11ओमन अपन परोसी ला फेर ये कभू नइं सिखोहीं,
12काबरकि मेंह ओमन के अधरम ला छेमा करहूं,