1तब मोला एक झन नापे के एक ठन लउठी दीस अऊ कहिस, “जा अऊ परमेसर के मंदिर अऊ बेदी ला नाप अऊ जऊन मन उहां अराधना करत हवंय, ओमन के गनती कर।
2पर बाहिरी अंगना ला छोंड़ दे; ओला झन नाप, काबरकि ओला आनजातमन ला दिये गे हवय, अऊ ओमन 42 महिना तक पबितर सहर ला रऊंदत रहिहीं।
3अऊ मेंह अपन दू झन गवाह ला सक्ति दूहूं, अऊ ओमन 1,260 दिन तक बोरा के कपड़ा+ 11:3 ओ समय म कोनो “बोरा के कपड़ा पहिरे”, त एकर मतलब होवय कि ओह कोनो दुख या समस्या म हवय।* पहिरके अगमबानी करहीं।”
4ये दू गवाहमन दू ठन जैतून के रूख अऊ दू ठन दीवट अंय, जऊन मन धरती के परभू के आघू म ठाढ़े रहिथें।+ 11:4 जकर 4:3, 11, 14*
5कहूं कोनो ओमन ला हानि पहुंचाय के कोसिस करथे, त ओमन के मुहूं ले आगी निकलथे अऊ ओमन के बईरीमन ला भसम कर देथे। जऊन कोनो येमन के हानि करे के कोसिस करथे, ओह अइसने मरही।
6ये दूनों झन करा अकास के कपाटमन ला बंद करे के सक्ति हवय, ताकि जब ओमन अगमबानी करंय, त पानी झन गिरय, अऊ येमन करा ये सक्ति घलो हवय कि पानी ला लहू म बदल दें अऊ जब कभू चाहंय, तब धरती ऊपर जम्मो किसम के महामारी लानंय।
7जब येमन अपन गवाही दे चुकहीं, त ओ पसु जऊन ह अथाह कुन्ड ले निकलही, येमन ले लड़ही, अऊ ओह येमन ला हराके मार डारही।
8येमन के लासमन ओ महान सहर के गली म पड़े रहिहीं, जिहां ओमन के परभू ला कुरूस ऊपर चघाय गे रिहिस। ये महान सहर ला सांकेतिक रूप म सदोम अऊ मिसर कहे जाथे।
9साढ़े तीन दिन तक जम्मो जाति, भासा, देस अऊ बंस के मनखेमन येमन के लास ला देखहीं, पर ओमा के कोनो घलो ओमन ला माटी नइं दीहीं।
10धरती के मनखेमन येमन के मरे ले आनंद मनाहीं अऊ खुस होवत एक-दूसर करा भेंट पठोहीं, काबरकि ये दूनों अगमजानीमन धरती के रहइयामन ला अब्बड़ दुख देय रिहिन।
11पर साढ़े तीन दिन के बाद, परमेसर के जिनगी देवइया सांस, ये दूनों म हमाईस अऊ ओमन अपन गोड़ म ठाढ़ हो गीन, अऊ जऊन मन ओमन ला देखिन, ओमन म बहुंते भय छा गीस।
12तब ओमन स्वरग ले एक ऊंचहा अवाज सुनिन, जऊन ह ओमन ला ये कहत रहय, “इहां ऊपर आ जावव।” अऊ ओमन अपन बईरीमन के देखते-देखत एक बादर म स्वरग चले गीन।
13ओहीच बेरा एक भारी भुइंडोल होईस अऊ सहर के दसवां भाग ह भरभरा के गिर गीस। सात हजार मनखेमन ओ भुइंडोल म मारे गीन अऊ जऊन मन बच गीन, ओमन डरा गीन अऊ स्वरग के परमेसर के महिमा करिन।
14दूसरा बिपत्ति बीत गीस, पर देखव! तीसरा बिपत्ति ह जल्दी अवइया हवय।
15तब सातवां स्वरगदूत ह अपन तुरही ला फूंकिस, अऊ स्वरग म ऊंचहा अवाज सुनई पड़िस, जऊन ह ये कहत रहय:
16अऊ चौबीस झन अगुवा, जऊन मन परमेसर के आघू म अपन सिंघासन ऊपर बिराजे रिहिन, मुहूं के भार गिरिन अऊ ये कहत परमेसर के अराधना करिन:
17“हे सर्वसक्तिमान परभू परमेसर, ओ जऊन ह हवय,
18देसमन गुस्सा करत रिहिन