नीतिबचन 10:1-31 CGOCV2024 - Bible AI

1सुलेमान के नीतिबचन:

2बेईमानी ले कमाय धन ले लाभ नइं होवय,

3यहोवा ह धरमी मनखे ला भूखा रहन नइं देवय,

4काम म ढिलई करइया मनखे गरीब हो जाथे,

5गरमी के महिना म जऊन ह फसल ला संकेलथे, ओह बुद्धिमान बेटा ए,

6धरमी मनखे ला बहुंत आसीस मिलथे,

7धरमी के नांव ह आसीस देय म उपयोग होथे,+ 10:7 देखव उत 48:20*

8बुद्धिमान ह हिरदय म हुकूम ला गरहन करथे,

9जऊन ह ईमानदारी से चलथे, ओह निडर रहिथे,

10जऊन ह गलत इरादा से आंखी मारथे, ओकर ले दुख मिलथे,

11धरमी मनखे के मुहूं ले जिनगी के बात निकलथे,

12काकरो ले घिन करई ह झगरा ला सुरू करथे,

13समझदार मनखे के बातचीत म बुद्धि पाय जाथे,

14बुद्धिमान ह गियान ला इकट्ठा करथे,

15धनवानमन के धन ह ओमन के गढ़वाला सहर होथे,

16धरमी मनखे के मजदूरी जिनगी अय,

17जऊन ह अनुसासन ला मानथे, ओह जिनगी के रसता ला देखाथे,

18जऊन ह लबारी मारके बईरता ला छुपाथे

19जिहां जादा बात होथे, उहां पाप घलो होथे,

20धरमी मनखे के बचन ह उत्तम चांदी सहीं अय,

21धरमी मनखे के बात ले बहुंते जन के भलई होथे,

22यहोवा के आसीस ले धन मिलथे,

23मुरूख ला खराप काम करई म खुसी मिलथे,

24जऊन बात ले दुस्ट मनखे ह डरथे, ओहीच बात ओकर संग होही,

25जब बिपत्ति चले जाथे, त ओकर संग दुस्टमन के घलो अन्त हो जाथे,

26जइसे दांत बर खट्टई अऊ आंखी बर धुआं होथे,

27यहोवा के भय माने ले मनखे के उमर ह बढ़थे,

28धरमी जन ला आसा रखई म आनंद मिलथे,

29यहोवा के रसता ह निरदोसीमन बर सरन-स्थान ए,

30धरमी जन सदा अटल बने रहिही,

31धरमी के मुहूं ले बुद्धि के बात निकलथे,

>