नीतिबचन 12:1-27 CGOCV2024 - Bible AI

1जऊन ह अनुसासन ले मया करथे, ओह गियान ले मया करथे,

2बने मनखेमन ऊपर यहोवा के किरपा होथे,

3कोनो दुस्ट काम करे के दुवारा इस्थिर नइं रह सकय,

4बने चालचलनवाली माईलोगन ह अपन घरवाला के मुकुट ए,

5धरमीमन के योजना ह सही होथे,

6दुस्टमन के बातचीत ह हतिया करे बर घात लगाय के बारे म होथे,

7दुस्टमन ला नास करे जाथे अऊ ओमन बचे नइं रहंय,

8मनखे के परसंसा ओकर बुद्धि के अनुसार होथे,

9जेकर करा खाय बर खाना तक नइं रहय अऊ अपन बड़ई मारथे

10धरमी मनखे अपन पसुमन के घलो चिंता करथे,

11जऊन मन अपन खेत ला कमाथें, ओमन करा बहुंत जेवन होही,

12दुस्ट मनखेमन, खराप काम करइया मनखेमन ले सुरकछा के मनसा करथें।

13खराप मनखेमन अपन खराप गोठ के कारन फंसथें,

14मनखेमन अपन सुघर गोठ के कारन बने चीज ले भर जाथें,

15मुरूखमन ला अपनेच रसता ह सही लगथे,

16मुरूखमन तुरते अपन रिस देखाथें,

17एक ईमानदार गवाह ह सच बोलथे,

18बिगर सोचे-बिचारे बोलनेवाला के गोठ ह तलवार सहीं चूभथे,

19सच बात ह हमेसा बने रहिथे,

20खराप काम करइयामन के मन म छल-कपट होथे,

21धरमी ला कोनो हानि नइं होवय,

22लबारी बात ले यहोवा बहुंत घिन करथे,

23समझदार मनखेमन अपन गियान ला अपन म रखथें,

24मेहनती मनखेमन सासन करथें,

25मनखे के उतावलापन ह ओकर मन ला उदास कर देथे,

26धरमी मनखे ह धियान देके अपन संगवारी चुनथे,

27आलसी मनखे कोनो काम करे नइं चाहय,

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