1बुद्धिमान बेटा ह अपन ददा के सिकछा म धियान लगाथे,
2मनखेमन अपन बने बात के कारन बने चीजमन के आनंद उठाथें,
3जऊन मन अपन मुहूं म लगाम लगाथें, ओमन अपन परान के रकछा करथें,
4आलसी मनखे के भूख कभू नइं मिटय,
5धरमी मनखे लबरा बात ले घिन करथे,
6धरमीपन ह ईमानदार मनखे के रकछा करथे
7एक मनखे अपन ला धनवान जताथे, पर ओकर करा कुछू नइं रहय;
8मनखे के धन ह ओकर जिनगी ला छुड़ा सकथे,
9धरमी मनखे के अंजोर ह बहुंत चमकथे,
10घमंड के कारन झगरा होथे,
11बेईमानी के पईसा ह खतम हो जाथे,
12जब आसा के पूरा होय म देरी होथे, त मन ह बिचलित होथे,
13जऊन ह हुकूम ला तुछ समझथे, ओह येकर दाम चुकाही,
14बुद्धिमान मनखे के सिकछा ह जिनगी के झरना ए,
15सुबुद्धि ले अनुग्रह मिलथे,
16जम्मो समझदार मनखे गियान के संग काम करथें।
17दुस्ट संदेसिया ह समस्या म पड़थे,
18जऊन ह अनुसासन ला तुछ समझथे, ओह गरीबी अऊ लज्जा म पड़थे,
19ईछा के पूरा होवई ह मन ला गुरतूर लगथे,
20बुद्धिमान के संगति कर, त तें घलो बुद्धिमान हो जाबे,
21समस्या ह पापीमन के पाछू लगे रहिथे,
22बने मनखे ह अपन नाती-पोतामन बर धन-संपत्ति छोंड़ जाथे,
23बंजर भुइयां ह गरीब बर फसल पईदा करथे,
24जऊन ह अपन लइकामन ला छड़ी ले अनुसासित नइं करय, ओह ओकर बईरी अय।