नीतिबचन 13:1-24 CGOCV2024 - Bible AI

1बुद्धिमान बेटा ह अपन ददा के सिकछा म धियान लगाथे,

2मनखेमन अपन बने बात के कारन बने चीजमन के आनंद उठाथें,

3जऊन मन अपन मुहूं म लगाम लगाथें, ओमन अपन परान के रकछा करथें,

4आलसी मनखे के भूख कभू नइं मिटय,

5धरमी मनखे लबरा बात ले घिन करथे,

6धरमीपन ह ईमानदार मनखे के रकछा करथे

7एक मनखे अपन ला धनवान जताथे, पर ओकर करा कुछू नइं रहय;

8मनखे के धन ह ओकर जिनगी ला छुड़ा सकथे,

9धरमी मनखे के अंजोर ह बहुंत चमकथे,

10घमंड के कारन झगरा होथे,

11बेईमानी के पईसा ह खतम हो जाथे,

12जब आसा के पूरा होय म देरी होथे, त मन ह बिचलित होथे,

13जऊन ह हुकूम ला तुछ समझथे, ओह येकर दाम चुकाही,

14बुद्धिमान मनखे के सिकछा ह जिनगी के झरना ए,

15सुबुद्धि ले अनुग्रह मिलथे,

16जम्मो समझदार मनखे गियान के संग काम करथें।

17दुस्ट संदेसिया ह समस्या म पड़थे,

18जऊन ह अनुसासन ला तुछ समझथे, ओह गरीबी अऊ लज्जा म पड़थे,

19ईछा के पूरा होवई ह मन ला गुरतूर लगथे,

20बुद्धिमान के संगति कर, त तें घलो बुद्धिमान हो जाबे,

21समस्या ह पापीमन के पाछू लगे रहिथे,

22बने मनखे ह अपन नाती-पोतामन बर धन-संपत्ति छोंड़ जाथे,

23बंजर भुइयां ह गरीब बर फसल पईदा करथे,

24जऊन ह अपन लइकामन ला छड़ी ले अनुसासित नइं करय, ओह ओकर बईरी अय।

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