नीतिबचन 15:1-32 CGOCV2024 - Bible AI

1कोमल जबाब ह गुस्सा ला दूर करथे,

2बुद्धिमान के बात ह गियान ला बढ़ाथे,

3यहोवा ह जम्मो कोति देखथे,

4सांति देवइया बात ह जिनगी के रूख ए,

5मुरूख ह दाई-ददा के अनुसासन के तिरस्कार करथे,

6धरमी के घर म बड़े धन रहिथे,

7बुद्धिमान के मुहूं ले गियान बगरथे,

8यहोवा ह दुस्ट के बलिदान ले घिन करथे,

9यहोवा दुस्ट के काम ले घिन करथे,

10जऊन ह सही रसता ला छोंड़ देथे, ओह कठोर अनुसासन के सामना करथे;

11मिरतू अऊ बिनास यहोवा के आघू म खुले रहिथें—

12ठट्ठा करइयामन डांट खाय ले खुस नइं होवंय,

13मन ह खुस रहे ले चेहरा ह घलो खुस दिखथे,

14समझदार मनखे ह गियान के खोज म रहिथे,

15दुखी मनखे के जम्मो दिनमन दुख ले भरे रहिथें,

16यहोवा के भय के संग थोरकन धन होवई ह

17मया के घर म थोरकन साग-भाजी के जेवन करई

18तुरते गुस्सा होवइया मनखे ह झगरा करथे,

19आलसी मनखे के रसता ह कांटा ले रूंधे रहिथे,

20बुद्धिमान बेटा ले ददा ह आनंदित होथे,

21मुरूख ला मुरूखता के बात ले आनंद होथे,

22बिगर सलाह के योजना ह सफल नइं होवय,

23सही उत्तर देय म मनखे ला आनंद मिलथे—

24बुद्धिमान बर जिनगी के रसता ह ऊपर कोति जाथे,

25यहोवा ह घमंडी के घर ला गिरा देथे,

26यहोवा ह दुस्ट के सोच-बिचार ले घिन करथे,

27लालची मनखेमन अपन परिवार के नास करथें,

28धरमी ह अपन मन म सोच-बिचार करके जबाब देथे,

29यहोवा ह दुस्ट मनखे ले दूरिहा रहिथे,

30संदेसिया के आंखी म चमक ह मन ला आनंदित करथे,

31जऊन ह जिनगी देवइया ताड़ना ऊपर धियान देथे,

32जऊन मन अनुसासन ला नइं मानंय, ओमन अपनआप ला तुछ समझथें,

>