नीतिबचन 16:1-32 CGOCV2024 - Bible AI

1मनखे ह अपन मन के योजना के बस म रहिथे,

2मनखे के जम्मो चालचलन ओकर नजर म सही जान पड़थे,

3अपन जम्मो काम ला यहोवा ला सऊंप दव,

4यहोवा ह जम्मो काम एक उदेस्य के संग करथे—

5यहोवा ह मन के जम्मो घमंड के बात ले घिन करथे।

6मया अऊ बिसवासयोग्यता के दुवारा पाप के पछताप होथे;

7जब यहोवा ह काकरो काम ले खुस होथे,

8अनियाय करके बहुंत कमाय ले

9मनखेमन अपन मन म अपन जिनगी जीये के योजना बनाथें,

10राजा के मुहूं ले गियान के बात निकलथे,

11ईमानदारी के नाप अऊ तराजू यहोवा के अय;

12राजामन गलत काम ले घिन करथें,

13राजामन ईमानदारी के बात म खुस होथें;

14राजा के गुस्सा ह मिरतू के दूत के सहीं अय,

15जब राजा के चेहरा ह खुस दिखथे, येकर मतलब जिनगी अय;

16बुद्धि ला पाना सोन के पाय ले जादा बने अय,

17ईमानदार मनखे के रसता ह बुरई ले दूरिहा रहिथे;

18बिनास के पहिली घमंड,

19घमंडी मनखेमन संग लूट के बांटा लेय के बदले

20जऊन ह निरदेस ऊपर धियान देथे, ओह बढ़थे,+ 16:20 या जऊन ह समझदारी के बात करथे, ओला बने चीज मिलथे*

21जेकर हिरदय म बुद्धि हवय, ओला समझदार मनखे कहे जाथे,

22समझदार मनखे बर समझदारी ह जिनगी के झरना ए,

23बुद्धिमान के मन ह ओकर बात ला समझदार बनाथे,

24गुरतूर बोली ह मधुमक्खी के छत्ता सहीं अय,

25एक डहार हवय, जऊन ह मनखे ला सही जान पड़थे,

26मेहनती मनखेमन के लालसा ओमन बर काम करथे;

27दुस्ट मनखे ह बुरई करे के बात सोचथे,

28जिद्दी मनखे ह झगरा ला बढ़ाथे,

29हिंसक मनखे ह अपन परोसी ला बहकाथे

30जऊन ह बार-बार आंखी के पलक झपकाथे, ओह सडयंत्र रचथे;

31पाके चुंदी ह सोभा देवइया मुकुट सहीं अय;

32धीरजवाला मनखे ह एक योद्धा ले बने होथे,

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