1मनखे ह अपन मन के योजना के बस म रहिथे,
2मनखे के जम्मो चालचलन ओकर नजर म सही जान पड़थे,
3अपन जम्मो काम ला यहोवा ला सऊंप दव,
4यहोवा ह जम्मो काम एक उदेस्य के संग करथे—
5यहोवा ह मन के जम्मो घमंड के बात ले घिन करथे।
6मया अऊ बिसवासयोग्यता के दुवारा पाप के पछताप होथे;
7जब यहोवा ह काकरो काम ले खुस होथे,
8अनियाय करके बहुंत कमाय ले
9मनखेमन अपन मन म अपन जिनगी जीये के योजना बनाथें,
10राजा के मुहूं ले गियान के बात निकलथे,
11ईमानदारी के नाप अऊ तराजू यहोवा के अय;
12राजामन गलत काम ले घिन करथें,
13राजामन ईमानदारी के बात म खुस होथें;
14राजा के गुस्सा ह मिरतू के दूत के सहीं अय,
15जब राजा के चेहरा ह खुस दिखथे, येकर मतलब जिनगी अय;
16बुद्धि ला पाना सोन के पाय ले जादा बने अय,
17ईमानदार मनखे के रसता ह बुरई ले दूरिहा रहिथे;
18बिनास के पहिली घमंड,
19घमंडी मनखेमन संग लूट के बांटा लेय के बदले
20जऊन ह निरदेस ऊपर धियान देथे, ओह बढ़थे,+ 16:20 या जऊन ह समझदारी के बात करथे, ओला बने चीज मिलथे*
21जेकर हिरदय म बुद्धि हवय, ओला समझदार मनखे कहे जाथे,
22समझदार मनखे बर समझदारी ह जिनगी के झरना ए,
23बुद्धिमान के मन ह ओकर बात ला समझदार बनाथे,
24गुरतूर बोली ह मधुमक्खी के छत्ता सहीं अय,
25एक डहार हवय, जऊन ह मनखे ला सही जान पड़थे,
26मेहनती मनखेमन के लालसा ओमन बर काम करथे;
27दुस्ट मनखे ह बुरई करे के बात सोचथे,
28जिद्दी मनखे ह झगरा ला बढ़ाथे,
29हिंसक मनखे ह अपन परोसी ला बहकाथे
30जऊन ह बार-बार आंखी के पलक झपकाथे, ओह सडयंत्र रचथे;
31पाके चुंदी ह सोभा देवइया मुकुट सहीं अय;
32धीरजवाला मनखे ह एक योद्धा ले बने होथे,