1सुख अऊ सांति के संग रोटी के एक कुटा खवई ह
2बुद्धिमान सेवक ह कलंक लानेवाला बेटा ऊपर राज करही
3चांदी ला परखे बर कुठाली अऊ सोन ला परखे बर भट्ठी होथे,
4दुस्ट मनखे ह धोखा देवइया के बात ला सुनथे;
5जऊन ह गरीब के हंसी उड़ाथे, ओह ओकर बनानेवाला के अपमान करथे;
6डोकरा-डोकरीमन के सोभा ओमन के नाती-पोता अंय,
7भक्तिहीन मुरूख के मुहूं ले उत्तम बात ह नइं फबे—
8घूस देवई ह देवइया के नजर म कोनो ला मोहित करे सहीं अय;
9जऊन ह मया ला बढ़ाथे, ओह अपराध ला भुलाथे,
10एक डांट ह समझदार मनखे ऊपर जतेक परभाव डालथे
11दुस्ट मनखेमन परमेसर के बिरोध म बिदरोह ला बढ़ाथें;
12लइका ले बिछड़े कोनो माई भालू ले भेंट होवई ह जादा बने अय,
13जऊन ह भलई के बदले बुरई करथे,
14झगरा सुरू करई ह पानी के बांध म छेद करे सहीं अय;
15दोसी ला छोंड़ देवई अऊ निरदोस ला दोसी ठहिरई—
16बुद्धि बिसाय बर मुरूखमन के हांथ म काबर पईसा होवय,
17संगवारी ह हर समय मया करथे,
18जेकर करा बुद्धि नइं ए, ओह सामान ला गिरवी रख देथे
19जऊन ह झगरा ले मया करथे, ओह पाप ले मया करथे;
20जेकर मन ह टेढ़ा हे, ओह उन्नति नइं करय;
21मुरूख लइका के होवई ह दुख के कारन होथे;
22खुसी ले भरे मन ह बढ़िया दवाई ए,
23दुस्ट मनखे ह नियाय ला बिगाड़े बर
24समझदार मनखे ह बुद्धि ला धियान म रखथे,
25मुरूख बेटा ले ओकर ददा ह दुखी होथे
26निरदोस ऊपर जुरबाना लगई बने नो हय,
27जेकर करा गियान होथे, ओह संभलके गोठियाथे,