नीतिबचन 17:1-27 CGOCV2024 - Bible AI

1सुख अऊ सांति के संग रोटी के एक कुटा खवई ह

2बुद्धिमान सेवक ह कलंक लानेवाला बेटा ऊपर राज करही

3चांदी ला परखे बर कुठाली अऊ सोन ला परखे बर भट्ठी होथे,

4दुस्ट मनखे ह धोखा देवइया के बात ला सुनथे;

5जऊन ह गरीब के हंसी उड़ाथे, ओह ओकर बनानेवाला के अपमान करथे;

6डोकरा-डोकरीमन के सोभा ओमन के नाती-पोता अंय,

7भक्तिहीन मुरूख के मुहूं ले उत्तम बात ह नइं फबे—

8घूस देवई ह देवइया के नजर म कोनो ला मोहित करे सहीं अय;

9जऊन ह मया ला बढ़ाथे, ओह अपराध ला भुलाथे,

10एक डांट ह समझदार मनखे ऊपर जतेक परभाव डालथे

11दुस्ट मनखेमन परमेसर के बिरोध म बिदरोह ला बढ़ाथें;

12लइका ले बिछड़े कोनो माई भालू ले भेंट होवई ह जादा बने अय,

13जऊन ह भलई के बदले बुरई करथे,

14झगरा सुरू करई ह पानी के बांध म छेद करे सहीं अय;

15दोसी ला छोंड़ देवई अऊ निरदोस ला दोसी ठहिरई—

16बुद्धि बिसाय बर मुरूखमन के हांथ म काबर पईसा होवय,

17संगवारी ह हर समय मया करथे,

18जेकर करा बुद्धि नइं ए, ओह सामान ला गिरवी रख देथे

19जऊन ह झगरा ले मया करथे, ओह पाप ले मया करथे;

20जेकर मन ह टेढ़ा हे, ओह उन्नति नइं करय;

21मुरूख लइका के होवई ह दुख के कारन होथे;

22खुसी ले भरे मन ह बढ़िया दवाई ए,

23दुस्ट मनखे ह नियाय ला बिगाड़े बर

24समझदार मनखे ह बुद्धि ला धियान म रखथे,

25मुरूख बेटा ले ओकर ददा ह दुखी होथे

26निरदोस ऊपर जुरबाना लगई बने नो हय,

27जेकर करा गियान होथे, ओह संभलके गोठियाथे,

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