नीतिबचन 18:1-23 CGOCV2024 - Bible AI

1जऊन ह अपनआप ला आने मन ले अलग कर लेथे, ओह अपन खुद के ईछा पूरा करे बर अइसने करथे

2मुरूख के मन ह समझ के बात म नइं लगय

3जब दुस्टता आथे, त अपमान घलो आथे,

4मुहूं के बचन ह गहिरा पानी सहीं अय,

5दुस्ट ला बचई

6मुरूखमन के गोठ ह ओमन ला झगरा म डालथे,

7मुरूखमन के बिनास ओमन के बात ले होथे,

8बकवास करई ह सुवादवाले जेवन सहीं होथे;

9जऊन ह अपन काम म ढीला होथे,

10यहोवा के नांव ह गढ़वाला महल ए;

11धनवानमन के धन ह ओमन के गढ़वाला सहर होथे;

12नास होय के पहिली मनखे के मन ह घमंडी हो जाथे,

13जऊन ह बात ला सुने के पहिली जबाब देथे,

14मनखे के आतमा ह बेमारी ला सह सकथे,

15समझदार मनखे के मन ह गियान पाथे,

16उपहार ह मनखे बर रसता खोलथे

17अदालत के मामला म जऊन ह पहिली बोलथे, ओह सही जान पड़थे,

18परची डारे ले झगरा के निपटारा होथे

19गलती करे भाई ला मनाई ह एक गढ़वाले सहर ला जीत लेवई ले कठिन ए;

20मनखे के पेट ह ओकर मुहूं के बात ले भरथे;

21मनखे के गोठ म जिनगी अऊ मिरतू के ताकत होथे,

22जऊन ह माईलोगन ले बिहाव करथे, ओह बने चीज पाथे

23गरीब ह दया पाय बर बिनती करथे,

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