नीतिबचन 19:1-28 CGOCV2024 - Bible AI

1जऊन गरीब के चालचलन ह सही रहिथे

2बिगर गियान के ईछा करई ह बने नो हय—

3मनखे ला ओकर मुरूखता ह बिनास कोति ले जाथे,

4धनी मनखे के बहुंत संगी बन जाथें,

5लबरा गवाह ह दंड पाही,

6नाना किसम के भोजन ले सासन करइया ह खुस होथे,

7गरीब मनखे ला ओकर जम्मो रिस्तेदार नापसंद करथें,

8जऊन ह बुद्धि पाथे, ओह जिनगी ले मया करथे;

9लबरा गवाह ह दंड पाही,

10मुरूख मनखे ला सुबिधा के जिनगी जीना नइं फबे—

11मनखे के बुद्धि ले धीरज आथे;

12राजा के गुस्सा ह सिंह के गरजन सहीं होथे,

13मुरूख लइका ह अपन ददा के बिनास के कारन होथे,

14घर अऊ संपत्ति दाई-ददा ले उत्तराधिकार म मिलथे,

15आलसीपन ले भारी नींद आथे,

16जऊन ह हुकूम ला मानथे, ओह अपन जिनगी ला बचाथे,

17जऊन ह गरीब ऊपर दया करथे, ओह यहोवा ला उधार देथे,

18अपन लइकामन के ताड़ना कर, काबरकि येमा आसा हवय;

19जऊन ह बहुंत गुस्सावाला ए, ओह जरूर दंड पावय;

20सलाह ला मान अऊ ताड़ना ला गरहन कर,

21मनखे ह अपन मन म बहुंत योजना बनाथे,

22मनखे ह जेकर ईछा करथे, ओह अटूट मया ए;

23यहोवा के भय मनई ह जिनगी के तरफ ले जाथे;

24आलसी मनखे ह अपन हांथ जेवन के थाली म तो डालथे;

25ठट्ठा करइया ला कोर्रा म मार, अऊ सीधा मनखे ह समझदारी के बात सीखही;

26जऊन ह अपन ददा ला लूटथे अऊ अपन दाई ला निकाल देथे,

27हे मोर बेटा, यदि तें सिकछा के बात सुने बर बंद कर देबे,

28भ्रस्ट गवाह ह नियाय ला ठट्ठा म उड़ाथे,

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