नीतिबचन 20:1-29 CGOCV2024 - Bible AI

1अंगूर के मंद ह ठट्ठा करवाथे अऊ आने मंद ह झगरा करवाथे;

2एक राजा के गुस्सा ह सेर के गरजन सहीं भय पईदा करथे;

3जऊन ह झगरा करे ले बचथे, येह ओकर बर आदर के बात अय,

4आलसी मनखेमन समय म खेत नइं जोतंय;

5मनखे के मन के उदेस्य ह गहिरा पानी के सहीं अय,

6बहुंते जन सही मया करे के दावा करथें,

7धरमी जन निरदोस जिनगी जीथें;

8जब राजा ह नियाय करे बर अपन सिंघासन म बईठथे,

9कोन ह कह सकथे, “मेंह अपन हिरदय ला सुध करे हंव;

10गलत वजन अऊ गलत नाप—

11छोटे लइकामन घलो अपन काम के दुवारा जाने जाथें,

12सुने बर कान अऊ देखे बर आंखी—

13नींद ले मया झन कर, नइं तो गरीब हो जाबे;

14बिसात बेरा बिसइया ह कहिथे, “येह बने नो हय, येह बने नो हय!”

15सोन अऊ बहुंत मंहगी रत्न तो हवंय

16ओ मनखे के कपड़ा ला लेय ले, जऊन ह कोनो अजनबी के जिम्मेदारी लेथे;

17बेईमानी करके कमाय जेवन ह मनखे ला मीठ लगथे,

18सलाह लेय के दुवारा योजना ह सफल होथे;

19बकवास करे ले भरोसा ह टूटथे;

20यदि कोनो अपन दाई या ददा ला सराप देथे,

21जऊन ह अपन उत्तराधिकार ला जल्दबाजी म ले लेथे

22अइसे झन कह, “मेंह तोर ये बुरई के बदला लूहूं!”

23यहोवा ह गलत वजन ले घिन करथे,

24मनखे के पांव ला यहोवा ह रसता देखाथे।

25जऊन ह बिगर सोचे-बिचारे कोनो चीज ला समरपित करथे

26बुद्धिमान राजा ह दुस्टमन ला पछरके निकालथे,

27मनखे के आतमा ह+ 20:27 या मनखे के बचन ह* यहोवा के दीया ए

28मया अऊ सच्चई राजा ला बनाय रखथे;

29जवानमन के गौरव ओमन के ताकत ए,

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