नीतिबचन 25:1-27 CGOCV2024 - Bible AI

1येमन सुलेमान के अऊ नीतिबचन अंय, जऊन ला यहूदा के राजा हिजकियाह के मनखेमन संकेलके रखे हवंय:

2परमेसर के महिमा कोनो बात ला छुपाके रखे म होथे;

3जइसने अकासमन ऊंच अऊ धरती ह गहिरा हवय,

4चांदी ले मईल ला हटावव,

5राजा के आघू ले दुस्ट करमचारीमन ला निकाल दव,

6राजा के आघू म अपन बड़ई झन करबे,

7येह जादा बने बात होही कि ओह तोला कहय, “इहां ऊपर आ,”

8ओला जल्दबाजी म अदालत झन ले जाबे,

9यदि तेंह अपन परोसी ला अदालत म ले जाथस,

10नइं तो जऊन ह येला सुनही, ओह तोर निन्दा करही

11सही बात ला कहई ह

12जइसने कि सोन के कनफूली या सुध सोन के जेवर होथे

13जइसने फसल लुवई के बेरा बरफ के ठंडा पानी होथे

14जइसने बिगर बारिस के बादर अऊ हवा होथे

15धीरज के जरिये एक सासन करइया ला मनाय जा सकथे,

16यदि तोला मंधरस मिलथे, त जतेक जरूरत हे, ओतेक खाबे—

17अपन परोसी के घर म कभू-कभू जाबे—

18जऊन ह अपन परोसी के बिरूध म लबरा गवाही देथे,

19बिपत्ति के बेरा बिसवासघाती ऊपर भरोसा करई ह

20जइसने जाड़ा के दिन म काकरो कपड़ा ला ले लेवई,

21यदि तोर बईरी ह भूखा हवय, त ओला खाय बर जेवन दे;

22अइसने करे ले, ओह लज्जित होही+ 25:22 या अइसने करके तेंह ओकर मुड़ ऊपर लज्जा के बरत कोइला के ढेर लगाबे*

23जइसने कि उत्तरी हवा ह बिगर आसा के बारिस लानथे,

24झगरा करइया घरवाली के संग घर म रहई के बदले

25जइसने कि थके-हारे मनखे बर ठंडा पानी होथे,

26जइसने कि चीखलावाले झरना या गंदा कुआं होथे,

27जादा मंधरस खवई ह बने नो हय,

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