नीतिबचन 27:1-26 CGOCV2024 - Bible AI

1कल के दिन बर घमंड झन कर,

2आने मन तोर बड़ई करंय तो करंय, पर तें अपन बड़ई झन करबे;

3पथरा ह भारी अऊ बालू ह एक बोझ होथे,

4गुस्सा ह निरदयी ए अऊ उत्तेजना ह बियाकुल कर देथे,

5खुला डांट ह

6कोनो संगी के चोट पहुंचई के भरोसा करे जा सकथे,

7जेकर पेट भरे होथे, ओला मधु-छत्ता के मंधरस घलो बने नइं लगय,

8अपन घर ला छोंड़के भागनेवाला ह

9इतर अऊ खुसबूदार धूप ह मन ला आनंदित करथे,

10अपन संगी या अपन परिवारिक संगी ला झन छोंड़बे,

11हे मोर बेटा, बुद्धिमान बन अऊ मोर मन ला आनंदित कर;

12समझदार मनखे ह खतरा ला देखके सरन ले लेथे,

13ओ मनखे के कपड़ा ला लेय ले, जऊन ह कोनो अजनबी मनखे के जिम्मेदारी लेथे;

14यदि कोनो मनखे ह बड़े बिहनियां अपन परोसी ला ऊंचहा अवाज म आसीस देथे,

15झगरा करइया घरवाली ह बारिस के दिन म

16ओला रोकई, हवा ला रोकई सहीं

17जइसने कि लोहा ह लोहा ला तेज करथे,

18जऊन ह अंजीर रूख के रखवारी करथे, ओह ओकर फर खाही,

19जइसने कि पानी ह चेहरा के परछाई ला देखाथे,

20मिरतू अऊ बिनास कभू संतोस नइं होवंय,

21चांदी ला परखे बर कुठाली अऊ सोन ला परखे बर भट्ठी होथे,

22चाहे तेंह मुरूख ला ओखली म पीस,

23अपन भेड़-बकरी के झुंड के दसा ला बने करके जान ले,

24काबरकि धन ह हमेसा बर नइं रहय,

25जब कांदी ला काटके हटाय जाथे, त नवां कांदी निकलथे

26भेड़ के पीलामन तोर बर कपड़ा दीहीं,

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