नीतिबचन 28:1-27 CGOCV2024 - Bible AI

1दुस्ट मनखेमन तब भी भागथें जब ओमन के पीछा कोनो नइं करत रहय,

2जब कोनो देस ह बिदरोह करथे, त ओकर ऊपर सासन करइया बहुंत होथें,

3जऊन सासन करइया ह गरीबमन ऊपर अतियाचार करथे,

4जऊन मन सिकछा ला नइं मानंय, ओमन दुस्ट मनखे के परसंसा करथें,

5दुस्ट मनखेमन सही बात ला नइं समझंय,

6उल्टा-सीधा काम करइया धनी मनखे ले

7समझदार बेटा ह सिकछा ऊपर धियान देथे,

8जऊन ह गरीबमन ले लाभ लेके या बियाज लेके अपन धन ला बढ़ाथे

9यदि कोनो मनखे ह मोर सिकछा ला अनसुनी करथे,

10जऊन ह ईमानदार मनखे ला बुरई के रसता म ले जाथे,

11धनी मनखेमन अपन खुद के आंखी म बुद्धिमान होथें;

12जब धरमी मनखेमन बिजयी होथें, त बहुंत खुसी होथे;

13जऊन ह अपन पाप ला छुपाथे, ओह नइं बढ़य,

14धइन ए ओ मनखे, जऊन ह हमेसा परमेसर के भय मानथे,

15जइसने कि गरजत सेर या हमला करइया भालू होथे

16अतियाचारी सासन करइया ह बलपूर्वक छीन लेथे,

17जऊन ह हतिया के दोस के पीरा म रहिथे

18जेकर चालचलन ह निरदोस रहिथे, ओह बचाय जाथे,

19जऊन मन अपन खेत ला कमाथें, ओमन करा बहुंत जेवन होही,

20बिसवासयोग्य मनखे ला बहुंत आसीस मिलही,

21पखियपात करई ह बने नो हय—

22कंजूस मनखे ह धनी बने बर उतावली करथे

23जऊन ह कोनो मनखे ला डांटथे, ओह आखिरी म

24जऊन ह अपन दाई या ददा ला लूटथे

25लालची मनखे ह झगरा ला बढ़ाथे,

26जऊन मन अपन ऊपर भरोसा रखथें, ओमन मुरूख होथें,

27जऊन मन गरीबमन ला देथें, ओमन ला कुछू चीज के कमी नइं होवय,

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