1दुस्ट मनखेमन तब भी भागथें जब ओमन के पीछा कोनो नइं करत रहय,
2जब कोनो देस ह बिदरोह करथे, त ओकर ऊपर सासन करइया बहुंत होथें,
3जऊन सासन करइया ह गरीबमन ऊपर अतियाचार करथे,
4जऊन मन सिकछा ला नइं मानंय, ओमन दुस्ट मनखे के परसंसा करथें,
5दुस्ट मनखेमन सही बात ला नइं समझंय,
6उल्टा-सीधा काम करइया धनी मनखे ले
7समझदार बेटा ह सिकछा ऊपर धियान देथे,
8जऊन ह गरीबमन ले लाभ लेके या बियाज लेके अपन धन ला बढ़ाथे
9यदि कोनो मनखे ह मोर सिकछा ला अनसुनी करथे,
10जऊन ह ईमानदार मनखे ला बुरई के रसता म ले जाथे,
11धनी मनखेमन अपन खुद के आंखी म बुद्धिमान होथें;
12जब धरमी मनखेमन बिजयी होथें, त बहुंत खुसी होथे;
13जऊन ह अपन पाप ला छुपाथे, ओह नइं बढ़य,
14धइन ए ओ मनखे, जऊन ह हमेसा परमेसर के भय मानथे,
15जइसने कि गरजत सेर या हमला करइया भालू होथे
16अतियाचारी सासन करइया ह बलपूर्वक छीन लेथे,
17जऊन ह हतिया के दोस के पीरा म रहिथे
18जेकर चालचलन ह निरदोस रहिथे, ओह बचाय जाथे,
19जऊन मन अपन खेत ला कमाथें, ओमन करा बहुंत जेवन होही,
20बिसवासयोग्य मनखे ला बहुंत आसीस मिलही,
21पखियपात करई ह बने नो हय—
22कंजूस मनखे ह धनी बने बर उतावली करथे
23जऊन ह कोनो मनखे ला डांटथे, ओह आखिरी म
24जऊन ह अपन दाई या ददा ला लूटथे
25लालची मनखे ह झगरा ला बढ़ाथे,
26जऊन मन अपन ऊपर भरोसा रखथें, ओमन मुरूख होथें,
27जऊन मन गरीबमन ला देथें, ओमन ला कुछू चीज के कमी नइं होवय,