नीतिबचन 30:1-32 CGOCV2024 - Bible AI

1याके के बेटा आगूर के कहावत—एक परभावसाली बचन।

2खचित मेंह मनखे नइं, सिरिप एक पसु के सहीं अंव;

3मेंह बुद्धि के बात नइं सीखे हंव,

4कोन ह स्वरग ऊपर जाके खाल्हे उतरिस?

5“परमेसर के हर एक बचन बिगर गलती के हवय;

6ओकर बचन म कुछू झन जोड़व,

7“हे यहोवा, मेंह तोर ले दू ठन चीज मांगत हंव;

8लबरापन अऊ लबरा गोठ ला मोर ले दूरिहा रख;

9अइसने झन होवय कि मोर करा जादा हो जावय अऊ मेंह तोर अनादर करंव

10“कोनो सेवक के निन्दा ओकर मालिक के आघू म झन करबे,

11“अइसने मनखे हवंय, जऊन मन अपन ददा ला सराप देथें

12अइसने मनखे हवंय, जऊन मन अपन ही नजर म सुध अंय

13अइसने मनखे हवंय, जऊन मन के आंखी ह घमंड ले भरे हवय,

14अइसने मनखे हवंय, जऊन मन के दांतमन तलवार सहीं

15“जोंक के दू झन बेटी हवंय।

16कबर,

17“ओ आंखी जऊन ह अपन ददा के मजाक उड़ाथे,

18“तीन चीज हवंय, जेमन मोला बहुंत अद्भूत लगथें,

19अकास म गिधवा के रसता,

20“एक छिनार माईलोगन के रसता ये अय:

21“तीन चीज के कारन धरती ह कांपथे,

22एक सेवक, जऊन ह राजा बन जाथे,

23एक तुछ माईलोगन, जऊन ह बिहाव करथे,

24“धरती म चार चीज छोटे हवंय,

25चांटीमन कम ताकतवाले जीव होथें,

26बिज्जूमन कम सक्तिवाले जन्तु होथें,

27फांफामन के राजा नइं होवय,

28एक छिपकली ला हांथ ले धरे जा सकथे,

29“तीन चीज हवंय, जेमन के चाल ह परभावसाली होथे,

30एक सेर, जऊन ह पसुमन म बलवान होथे, ओह काकरो आघू ले डरके नइं हटय;

31एक अकड़के चलइया मुरगा,

32“यदि तेंह मुरूखता करके अपन बड़ई करथस,

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