नीतिबचन 5:1-22 CGOCV2024 - Bible AI

1हे मोर बेटा, मोर बुद्धि के बात ऊपर धियान लगा,

2ताकि तोर बिबेक ह सही रहय

3काबरकि छिनारी माईलोगन के मुहूं ले गुरतूर बात निकलथे,

4पर आखिर म, ओह पित्त के सहीं करू,

5ओकर गोड़मन मिरतू कोति जाथें;

6ओह जिनगी के रसता के बारे म बिचार नइं करय;

7एकरसेति, हे मोर बेटामन, मोर बात ला सुनव,

8अइसने छिनारी माईलोगन ले दूरिहा रहव,

9नइं तो तुम्हर मान-सम्मान दूसरमन करा चल दीही

10या अजनबीमन तुम्हर संपत्ति म मजा उड़ाहीं

11अऊ अपन जिनगी के आखिरी बेरा म,

12अऊ ये कहिहू, “मेंह अनुसासन म काबर नइं रहेंव,

13मेंह अपन गुरूमन के बात ला नइं मानेंव

14मेंह तुरते परमेसर के मनखेमन के सभा म

15तें अपन ही जलासय,

16का तोर झरना के पानी गलीमन म,

17ओह सिरिप तोरेच रहय,

18तोर पानी के सोता आसीसित रहय,

19ओह तोर बर एक मयारू हिरनी, एक सुघर सांबरनी सहीं होवय—

20हे मोर बेटा, आने मनखे के घरवाली के मया म तेंह काबर मोहित होबे?

21काबरकि तोर चालचलन ला यहोवा ह देखत हवय,

22दुस्ट मनखेमन अपनेच अधरम के काम म फंसथें;