नीतिबचन 6:1-34 CGOCV2024 - Bible AI

1हे मोर बेटा, यदि तेंह अपन परोसी बर जमानत ले हस,

2तेंह अपन ही बात म फंस गे हस,

3त हे मोर बेटा, अपनआप ला बंचाय बर अइसे कर,

4जागत रह;

5अपनआप ला छुड़ा, जइसे हिरन ह सिकारी के हांथ ले,

6हे अलाल मनखे, चांटीमन करा जा;

7ओमन ला न तो कोनो हुकूम देवइया होथे,

8तभो ले ओमन धूपकाला म अपन खाना संकेलथें

9हे अलाल मनखे, तेंह कब तक सोवत रहिबे?

10थोरकन अऊ नींद, थोरकन अऊ ऊंघासी,

11अऊ गरीबी ह चोर सहीं,

12समस्या खड़े करइया अऊ दुस्ट मनखे ह

13ओह खराप इरादा से आंखी मारथे,

14ये काम ओह अपन खराप मन ले बुरई के बात ला सोचके करथे;

15एकरसेति, बिपत्ति ह ओकर ऊपर अचानक आ जाही;

16छै ठन चीज ला यहोवा ह नापसंद करथे,

17घमंड ले भरे आंखी,

18दुस्टता के बात सोचनेवाला हिरदय,

19लबरा गवाह, जऊन ह लबारी के ऊपर लबारी मारथे

20हे मोर बेटा, अपन ददा के हुकूम ला मान

21ये बातमन ला हमेसा अपन हिरदय म रख;

22जब तेंह रेंगबे, त येमन तोर अगुवई करहीं;

23काबरकि ये हुकूम ह एक दीया सहीं अय;

24येमन तोला परोसी के घरवाली,

25ओकर सुघरता ला देखके अपन मन म ओकर लालसा झन कर

26काबरकि एक बेस्या के कीमत एक रोटी हो सकथे,

27का अइसे हो सकथे कि कोनो मनखे आगी ला अपन कोरा म रखे

28या का अइसे हो सकथे कि कोनो मनखे आगी म रेंगे

29अइसे ओ मनखे के दसा होथे, जऊन ह आने के घरवाली संग सुतथे;

30जऊन चोर ह अपन पेट के भूख ला मिटाय बर चोरी करथे,

31तभो ले यदि ओह पकड़े जाथे, त ओला सात गुना भरना पड़ही;

32जऊन ह बेभिचार करथे, ओकर करा बुद्धि नइं ए;

33ओह मार खाथे अऊ अपमानित होथे,

34काबरकि जलन ह घरवाला ला बहुंत गुस्सा देवाथे,