नीतिबचन 9:1-17 CGOCV2024 - Bible AI

1बुद्धि ह अपन घर बनाईस;

2ओह अपन पसु के मांस रांधे हवय अऊ अंगूर के मंद तियार करे हवय;

3ओह अपन सेवकमन ला पठोय हवय,

4“जऊन मन सीधा-साधा अंय, ओमन मोर घर म आवंय!”

5“आवव, मोर खाना खावव

6अपन सीधा-साधा रसता ला छोंड़व, त तुमन जीयत रहिहू;

7जऊन ह ठट्ठा करइया ला सिकछा देथे, ओकर बेजत्ती होथे;

8ठट्ठा करइयामन ला झन डांट, नइं तो ओमन तोर ले घिन करहीं;

9बुद्धिमान मनखे ला सिकछा दे, त ओमन अऊ बुद्धिमान होहीं;

10यहोवा के भय मनई बुद्धि के सुरूआत अय,

11काबरकि परमेसर के दुवारा तोर उमर बढ़ही,

12कहूं तेंह बुद्धिमान अस, त तोर बुद्धि के कारन तोला ईनाम मिलही;

13मुरूखता ह एक ब्यवस्थाहीन माईलोगन सहीं अय;

14ओह अपन घर के कपाट करा बईठथे;

15अऊ जऊन मन उहां ले होवत, अपन रसता म सीधा जावत रहिथें,

16“जऊन मन सीधा-साधा अंय, ओमन मोर घर म आवंय!”

17“चोराय पानी ह मीठ लगथे;