1सहर+ 1:1 या यरूसलेम सहर* ह कइसे निरजन हो गे हवय,
2रथिया ओह फूट-फूटके रोथे,
3दुख अऊ कठोर मेहनत के बाद,
4सियोन के रसतामन बिलाप के अंय,
5ओकर बईरीमन ओकर मालिक बन गे हवंय;
6बेटी सियोन के पूरा वैभव ह
7अपन पीरा अऊ एती-ओती भटके के दिन म
8यरूसलेम ह बहुंत पाप करे हवय
9ओकर गंदगी ह ओकर लंहगा म रहिथे;
10बईरी ह ओकर जम्मो खजाना ऊपर
11ओकर जम्मो मनखेमन कराहथें
12“तुमन जम्मो, जऊन मन ये रसता ले होके निकलथव, का तुमन बर येह कुछू नो हय?
13“ऊंच जगह ले यहोवा ह
14“मोर पापमन ला एक जुड़ा म बांध दिये गे हवय;
15“परभू ह मोर बीच म
16“येकरे कारन मेंह रोथंव
17सियोन ह अपन हांथमन ला फईलाथे,
18“यहोवा ह धरमी अय,
19“मेंह अपन संगीमन ला बलांय
20“हे यहोवा, देख, मेंह कतेक पीरा म हंव!
21“मनखेमन मोर कलहरई ला सुने हवंय,