1हे यहोवा, तेंह दूरिहा म काबर ठाढ़े रहिथस?
2दुस्ट मनखे ह अपन घमंड म दुरबल मनखे के सिकार कर लेथे;
3दुस्ट ह अपन मन के लालसा ऊपर घमंड करथे;
4अपन घमंड के कारन दुस्ट मनखे ह परमेसर के खोज नइं करय;
5ओकर रसता ह हमेसा उन्नति के रहिथे;
6ओह अपनआप ले कहिथे, “मोला कभू कोनो हला नइं सकंय।”
7ओकर मुहूं ह लबारी अऊ धमकी के बात ले भरे हवय,
8ओह गांवमन के लकठा म घात लगाय बईठे रहिथे;
9छुपके बईठे सिंह के सहीं ओह घात म रहिथे।
10ओकर सिकारमन कुचरे जाथें, ओमन गिर जाथें;
11ओह अपनआप ले कहिथे, “परमेसर ह कभू धियान नइं दीही;
12हे यहोवा, उठ! हे परमेसर अपन हांथ ला उठा।
13दुस्ट मनखे ह काबर परमेसर ला तुछ समझथे?
14पर हे परमेसर, तेंह दुखी मनखे के समस्या ला देखथस;
15दुस्ट मनखे के बाहां ला टोर दे;
16यहोवा ह सदाकाल बर राजा अय;
17हे यहोवा, तेंह दुखी मनखे के मन के बात+ 10:17 या पराथना* ला सुनथस;