भजन-संहिता 102:1-27 CGOCV2024 - Bible AI

1हे यहोवा, मोर पराथना ला सुन;

2जब मेंह दुखित हंव,

3काबरकि मोर जिनगी के समय ह धुआं के सहीं खतम होवत हे;

4मोर हिरदय म रोग लगे हे अऊ कांदी सहीं मुरझा गे हवय;

5अपन पीरा म मेंह जोर-जोर से कलहरत हंव

6मेंह सुन्ना जगह के एक उल्लू अंव,

7मेंह पड़े-पड़े जागत रहिथंव; मेंह छानी म

8दिन भर मोर बईरीमन मोला ताना मारत रहिथें;

9काबरकि राख ला मेंह खाना के रूप म खाथंव

10येह तोर बड़े कोप के कारन होय हवय,

11मोर उमर ह संझा के ढरत छइहां के सहीं अय;

12पर हे यहोवा, तेंह सदाकाल बर बिराजमान हस;

13तेंह उठबे अऊ सियोन ऊपर दया करबे,

14काबरकि ओकर पथरामन तोर सेवकमन बर मयारू अंय;

15जाति-जाति के मनखेमन यहोवा के नांव के भय मानहीं,

16काबरकि यहोवा ह सियोन ला फेर बनाही

17ओह गरीब-लाचार के पराथना के जबाब दीही;

18येला अवइया पीढ़ी के मनखेमन बर लिखे जावय,

19“यहोवा ह अपन ऊंच पबितर-स्थान ले खाल्हे देखिस,

20ताकि कैदीमन के कलहरई ला सुनय

21ताकि जब देस-देस अऊ राज-राज के मनखेमन

22त सियोन म यहोवा के नांव के घोसना

23मोर जिनगी के यातरा म, ओह मोर बल ला टोर दीस;

24एकरसेति मेंह कहेंव:

25सुरूआत म तेंह धरती के नीव रखे,

26ओमन तो नास हो जाहीं, पर तेंह बने रहिबे;

27पर तेंह वइसनेच के वइसने रहिथस,

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