भजन-संहिता 104:1-34 CGOCV2024 - Bible AI

1हे मोर मन, यहोवा के परसंसा कर।

2यहोवा ह अपनआप ला एक कपड़ा के सहीं अंजोर ले लपेटे रहिथे;

3अऊ अपन ऊपर के कमरा के मियारमन ला ओमन के पानी म रखथे।

4ओह हवा ला अपन संदेसिया+ 104:4 या स्वरगदूत*

5ओह धरती ला ओकर नीव म इस्थिर करथे;

6तेंह येला एक कपड़ा ढांपे सहीं गहिरा समुंदर ले ढांप दे हस;

7पर तोर डांटे ले पानी ह भाग गीस,

8ओमन पहाड़मन के ऊपर बहे लगिन,

9तेंह एक सीमना तय करय, जेला ओमन लांघ नइं सकंय;

10तेंह घाटीमन ले पानी के धारा निकालथस;

11ओमन भुइयां के जम्मो पसुमन ला पानी देथें;

12अकास के चिरईमन पानी के तीर म अपन खोंधरा बनाथें;

13ओह अपन ऊपरी कमरा ले पहाड़मन ऊपर पानी गिराथे;

14ओह पसुमन बर कांदी उगाथे,

15अंगूर के मंद, जेह मनखे के मन ला खुसी देथे,

16यहोवा के रूखमन ला

17उहां चिरईमन अपन खोंधरा बनाथें;

18ऊंच पहाड़मन जंगली छेरीमन बर होथें;

19ओह अलग-अलग मौसम ला बताय बर चंदा ला बनाईस,

20तेंह अंधियार लानथस, तब रथिया होथे,

21सिंहमन अपन सिकार बर गरजथें

22सूरज ह निकलथे, अऊ ओमन चुपेचाप चले जाथें;

23तब मनखेमन अपन-अपन काम म,

24हे यहोवा, तोर काममन बहुंते हवंय!

25समुंदर हवय, बहुंत बड़े अऊ लम्बा अऊ चौड़ा,

26उहां पानी जहाजमन आथें-जाथें,

27जम्मो जीवमन तोर कोति ताकथें

28जब तेंह ओमन ला जेवन देथस,

29जब तेंह अपन मुहूं ला छिपा लेथस,

30जब तेंह अपन आतमा ला भेजथस,

31यहोवा के महिमा ह सदाकाल तक बने रहय;

32जब ओह धरती ला देखथे, त धरती ह कांपथे,

33मेंह अपन जिनगी भर यहोवा के गीत गाहूं;

34जइसे कि मेंह यहोवा म आनंदित रहिथंव,

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