1यहोवा ला धनबाद देवव, काबरकि ओह बने अय;
2यहोवा के दुवारा छोंड़ाय गय मनखेमन ये बात कहंय—
3जेमन ला ओह देस-देस ले,
4कुछू झन निरजन प्रदेस के बेकार जगह म भटकिन,
5ओमन भूखन अऊ पीयासन रिहिन,
6तब ओमन अपन संकट के बेरा म यहोवा ला पुकारिन,
7ओह ओमन ला एक सीधा रसता ले एक सहर म ले गीस
8ओमन यहोवा के अटूट मया अऊ मानव-जाति बर करे गे अद्भूत काम बर
9काबरकि ओह पीयासन के पीयास बुझाथे
10कुछू मन अंधियार, घोर अंधियार म बईठिन,
11काबरकि ओमन परमेसर के हुकूम के बिरूध चलिन
12एकरसेति ओह ओमन ला बहुंत मेहनत के काम म लगाईस;
13तब ओमन अपन संकट के बेरा यहोवा ला पुकारिन,
14ओह ओमन ला अंधियार, घिटके अंधियार ले बाहिर निकालिस,
15ओमन यहोवा ला ओकर अटूट मया बर धनबाद देवंय
16काबरकि ओह कांसा के दुवारमन ला टोर देथे
17कुछू जन अपन बिदरोही काम के कारन मुरूख बन गीन
18ओमन ला जम्मो किसम के जेवन ले अरूचि हो गीस
19तब ओमन अपन संकट म यहोवा ला पुकारिन,
20ओह अपन बचन के दुवारा ओमन ला चंगा करिस;
21ओमन यहोवा के अटूट मया
22ओमन धनबाद के बलिदान चघावंय
23कुछू मनखेमन पानी जहाज म समुंदर म गीन;
24ओमन यहोवा के काममन ला,
25काबरकि ओकर कहे ले आंधी चलिस
26ओमन अकास तक ऊपर उठिन अऊ खाल्हे गहरई तक गीन;
27ओमन मतवारमन सहीं चक्कर खावत रिहिन अऊ लड़खड़ावत रिहिन;
28तब ओमन अपन संकट म यहोवा ला पुकारिन,
29ओह आंधी ला सांत कर दीस;
30लहरामन के सांत होय ले ओमन खुस होईन,
31ओमन यहोवा ला ओकर अटूट मया
32ओमन मनखेमन के सभा म ओकर नांव ला ऊंचहा करंय
33उहां रहइया मनखेमन के दुस्टता के कारन
34पानी के सोतामन ला सूखा भुइयां,
35ओह निरजन भुइयां ला पानी के तरिया
36उहां ओह भूखा मनखेमन ला रहे बर लानिस,
37ओमन खेतमन ला बोईन अऊ अंगूर के बारी लगाईन
38ओह ओमन ला आसीस दीस अऊ ओमन के संखिया बहुंत हो गीस,
39तब ओमन के संखिया घटे लगिस, अऊ सतावा,
40जऊन ह परभावसाली मनखेमन के अपमान करथे,
41पर ओह जरूरतमंद मनखेमन ला ओमन के दुख ले निकालथे
42सीधवा मनखेमन देखके आनंद मनाथें,