भजन-संहिता 112:1-9 CGOCV2024 - Bible AI

1यहोवा के परसंसा करव।

2ओमन के लइकामन देस म सक्तिसाली होहीं;

3ओमन के घर म धन अऊ सम्पन्नता होही,

4ईमानदार मनखे बर अंधियार म घलो अंजोर निकलथे,

5ओमन के भलई होही, जऊन मन उदार मन के अंय अऊ खुले मन से उधार देथें,

6खचित धरमी ह कभू नइं डगमगाही;

7ओमन खराप संदेस सुनके भयभीत नइं होहीं;

8ओमन के हिरदय ह सुरकछित हवय, ओमन ला कोनो किसम के भय नइं होवय;

9ओमन गरीबमन ला दिल खोलके दान दे हवंय,

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