1मेंह ओमन के संग आनंद मनाथंव, जऊन मन मोला कहिन,
2हे यरूसलेम, तोर दुवारमन म
3यरूसलेम ला ओ सहर के सहीं बनाय गे हवय,
4ओही ह ओ जगह ए, जिहां गोत्र-गोत्र के मनखे—
5उहां नियाय बर सिंघासनमन हवंय,
6यरूसलेम के सांति बर पराथना करव:
7तोर दीवारमन+ 122:7 या तोर सहर के दीवारमन* के भीतर म सांति
8अपन परिवार अऊ संगवारीमन के हित म,