1यहोवा, जऊन ह मोर चट्टान ए, ओकर परसंसा होवय,
2ओह मोर मयारू परमेसर अऊ मोर किला,
3हे यहोवा, मनखेमन का अंय कि तेंह ओमन के खियाल रखथस?
4ओमन तो सांस के सहीं अंय;
5हे यहोवा, अपन स्वरग ला खाल्हे करके उतर आ;
6बिजली कड़काके बईरी ला तितिर-बितिर कर दे;
7ऊंच स्थान ले अपन हांथ बढ़ा;
8जेमन के मुहूं ले बहुंत लबारी बात निकलथे,
9हे मोर परमेसर, मेंह तोर बर एक नवां गीत गाहूं;
10तें, जऊन ह कि राजामन ला जय देथस,
11परदेसीमन के हांथ ले मोला बचा
12तब हमर बेटामन अपन जवानी म
13हमर कोठारमन हर किसम के
14हमर बईलामन भारी सामान खींचके ले जाहीं।+ 144:14 या हमर जाति के सरदार ह अटल बने रहिही*