1हे मोर परमेसर, हे मोर परमेसर, तेंह मोला काबर तियाग दे हस?
2हे मोर परमेसर, मेंह दिन म गोहारथंव, पर तेंह जबाब नइं देवस,
3पर तेंह पबितर परमेसर के रूप म बिराजमान हस;
4तोर ऊपर ही हमर पुरखामन भरोसा करिन;
5तोर ले ओमन गोहारिन अऊ ओमन बचाय गीन;
6पर में तो एक कीरा अंव, मनखे नइं,
7ओ जम्मो झन, जेमन मोला देखथें, ओमन मोर हंसी उड़ाथें;
8ओमन कहिथें, “ओह यहोवा ऊपर भरोसा करथे,
9तभो ले तेंह मोला गरभ ले बाहिर लानय,
10जनम ले ही मोला तोर देखरेख म छोंड़ दिये गीस;
11मोर ले दूरिहा झन रह,
12बहुंत अकन सांड़मन मोला घेरत हवंय;
13गरजत सिंह, जेमन अपन सिकार ला फाड़ डालथें,
14मेंह पानी कस ढारे जावत हंव,
15मोर मुहूं ह माटी के टूटे बरतन सहीं सूखा गे हवय,
16कुकुरमन मोला घेरत हें,
17मोर जम्मो हाड़ामन दिखत हवंय;
18ओमन मोर ओनहा ला आपस म बांट लेथंय
19पर हे यहोवा, तेंह मोर ले दूरिहा झन रह।
20मोर जिनगी ला तलवार ले बचा,
21सिंहमन के मुहूं ले मोला बचा;
22मेंह अपन भाईमन के आघू म तोर नांव के परचार करहूं;
23हे यहोवा के भय मनइयामन, ओकर परसंसा करव!
24काबरकि ओह दुख म परे मनखे ला तुछ नइं समझे हे
25बड़े सभा म तोर परसंसा के बिसय तोरेच करा ले आथे;
26गरीबमन खाहीं अऊ संतुस्ट हो जाहीं;
27धरती के जम्मो छोर तक मनखेमन यहोवा ला
28काबरकि राज ह यहोवा के ही अय
29धरती के जम्मो धनवानमन भोज खाहीं अऊ ओकर अराधना करहीं;
30अवइया पीढ़ी के मनखेमन ओकर सेवा करहीं;