1हे स्वरगीय जीवमन,+ 29:1 स्वरगीय जीवमन के मतलब स्वरगदूतमन हो सकथे* यहोवा के बखान करव,
2यहोवा के नांव के मुताबिक ओकर बखान करव;
3यहोवा के अवाज समुंदर के ऊपर म हवय;
4यहोवा के अवाज ह सक्तिसाली अय;
5यहोवा के अवाज ह देवदार के रूख ला टोर देथे;
6ओह लबानोन ला एक बछरू के सहीं
7यहोवा के अवाज ह
8यहोवा के अवाज ह बीरान भुइयां ला हला देथे;
9यहोवा के अवाज ह बांज के रूख ला मुरकेट देथे+ 29:9 या यहोवा ह हिरन ले पीला जनमवाथे*
10यहोवा ह बाढ़ के पानी ऊपर बिराजमान होथे;