1हे स्वरगीय जीवमन,+ 29:1 स्वरगीय जीवमन के मतलब स्वरगदूतमन हो सकथे यहोवा के बखान करव, यहोवा के महिमा अऊ बल के बखान करव।
2यहोवा के नांव के मुताबिक ओकर बखान करव; यहोवा के पबितरता के सोभा म ओकर अराधना करव।
3यहोवा के अवाज समुंदर के ऊपर म हवय; महिमा के परमेसर ह गरजथे, यहोवा ह समुंदर के भयंकर लहरामन ऊपर गरजथे।
4यहोवा के अवाज ह सक्तिसाली अय; यहोवा के अवाज ह सानदार हवय।
5यहोवा के अवाज ह देवदार के रूख ला टोर देथे; यहोवा ह लबानोन के देवदार रूखमन ला कुटा-कुटा कर देथे।
6ओह लबानोन ला एक बछरू के सहीं अऊ सिरयोन+ 29:6 हेरमोन पहाड़ ला जंगली बईला के सहीं उछालथे।
7यहोवा के अवाज ह बिजली के चमक के संग चोट करथे।
8यहोवा के अवाज ह बीरान भुइयां ला हला देथे; यहोवा ह कादेस के बीरान भुइयां ला घलो हला देथे।
9यहोवा के अवाज ह बांज के रूख ला मुरकेट देथे+ 29:9 या यहोवा ह हिरन ले पीला जनमवाथे अऊ जंगल म पतझड़ हो जाथे। अऊ ओकर मंदिर म जम्मो झन चिचियाके कहिथें, “परमेसर के महिमा होवय!”
10यहोवा ह बाढ़ के पानी ऊपर बिराजमान होथे; यहोवा ह सदाकाल बर राजा के रूप म बिराजमान होथे।
11यहोवा ह अपन मनखेमन ला ताकत देथे; यहोवा ह अपन मनखेमन ला सांति के आसीस देथे।