1धइन अय ओ मनखे,
2धइन अय ओ मनखे,
3जब मेंह कलेचुप रहंय,
4काबरकि रात अऊ दिन
5तब मेंह अपन पाप ला तोर आघू म मान लेंव
6एकरसेति जम्मो बिसवासयोग्य मनखेमन तोर ले पराथना करंय
7तेंह मोर छुपे के जगह अस;
8मेंह तोला निरदेस दूहूं अऊ ओ रसता के बात सिखाहूं, जेमा तोला जाना चाही;
9तेंह घोड़ा अऊ खच्चर के सहीं झन बन,
10दुस्टमन के दुख-तकलीफ बहुंत हवय,