भजन-संहिता 34:1-21 CGOCV2024 - Bible AI

1मेंह हर समय यहोवा के परसंसा करहूं;

2मेंह यहोवा ऊपर घमंड करहूं;

3मोर संग यहोवा के महिमा करव;

4मेंह यहोवा ले पराथना करेंव; अऊ ओह मोला जबाब दीस;

5जऊन मन ओकर कोति देखथें, ओमन दीप्तिमान होथें;

6ये दीन-हीन मनखे ह पुकारिस, अऊ यहोवा ह ओकर बात ला सुनिस;

7यहोवा के स्वरगदूत ह ओमन के चारों कोति डेरा डालथे, जऊन मन ओकर भय मानथें,

8परखके देखव कि यहोवा ह बने अय;

9हे ओकर पबितर मनखेमन, तुमन यहोवा के भय मानव,

10भले ही सिंह ह कमजोर हो सकथे अऊ भूखा रह सकथे,

11हे मोर लइकामन, आवव, मोर बात ला सुनव;

12तुमन म ले जऊन ह भी जिनगी ले मया करथे

13त ओह अपन जीभ ला खराप बात ले

14बुरई ला छोंड़के भलई करव;

15यहोवा के नजर ह धरमीमन ऊपर लगे रहिथे,

16पर यहोवा ह बुरई करइयामन के बिरोध करथे,

17धरमीमन गोहारथें, अऊ यहोवा ह ओमन के सुनथे;

18यहोवा ह टूटे मनवाला के लकठा म रहिथे

19धरमी मनखे करा बहुंत समस्या हो सकथे,

20ओह ओकर जम्मो हाड़ामन के रकछा करथे,

21बुरई ही दुस्ट मनखे ला मार डालही;

cle>