भजन-संहिता 35:1-27 CGOCV2024 - Bible AI

1हे यहोवा, ओमन के बिरोध कर, जेमन मोर बिरोध करथें;

2ढाल अऊ कवच ला ले;

3जऊन मन मोर पीछा करथें,

4जऊन मन मोर परान के पाछू पड़े हवंय,

5ओमन हवा म उड़ जानेवाला भूंसा के सहीं हो जावंय,

6ओमन के डहार ह अंधियार हो जावय अऊ ओमा फिसलन होवय,

7काबरकि ओमन बिगर कारन के मोर बर जाल बिछाईन

8अचानक ओमन के बिनास हो जावय—

9तब मोर आतमा ह यहोवा म आनंदित होही

10मोर पूरा हिरदय ह कहिही,

11निरदयी गवाहमन ठाढ़ होथें;

12ओमन मोर भलई के बदले मोर ले बुरई करथें

13तभो ले जब ओमन बेमार रिहिन, त मेंह ओमन ला दुख के ओनहा ओढ़ांय

14त मेंह सोक मनांय

15पर जब मेंह ठोकर खांय, त ओमन खुसी से जूर गीन;

16अधरमी मनखे सहीं ओमन जलन म मोर हंसी उड़ाईन;

17हे परभू, तेंह कब तक देखत रहिबे?

18मेंह बड़े सभा म तोला धनबाद दूहूं;

19जऊन मन बिगर कारन के मोर बईरी अंय,

20ओमन सांति के बात नइं करंय,

21ओमन मोर हंसी उड़ाके कहिथें, “अहा! अहा!

22हे यहोवा, तेंह तो येला देखे हस; चुप झन रह।

23जाग, अऊ मोर बचाव करे बर उठ!

24हे यहोवा मोर परमेसर, अपन धरमीपन म मोर रकछा कर;

25ओमन ला ये सोचन झन दे, “अहा, इही बात तो हमन चाहत रहेंन!”

26ओ जम्मो, जऊन मन मोर दुख म खुस होथें,

27जऊन मन मोर सही साबित होय म खुस होथें,

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