1मेंह अपन मन म कहेंव, “मेंह अपन चालचलन ऊपर धियान दूहूं
2एकरसेति मेंह एकदम चुप रहेंव,
3मोर हिरदय ह भीतरे-भीतर बरत रिहिस।
4“हे यहोवा, मोला मोर जिनगी के अन्त ला देखा
5तेंह मोर जिनगी के दिन ला सिरिप बीता भर कर दे हस;
6“खचित हर एक जन छइहां के सहीं एती-ओती फिरत रहिथें;
7“पर अब, हे परभू, मेंह का चीज के डहार देखत हंव?
8मोला मोर जम्मो अपराध ले बचा ले;
9मेंह चुप रहेंव; अऊ अपन मुहूं नइं खोलेंव,
10तेंह मोर ऊपर जऊन बिपत्ति डाले हस, ओला हटा ले;
11जब तेंह कोनो मनखे ला ओकर पाप के कारन डांटथस अऊ दंड देथस,
12“हे यहोवा, मोर पराथना ला सुन,