भजन-संहिता 4:1-7 CGOCV2024 - Bible AI

1हे मोर धरमी परमेसर,

2हे मनखेमन! तुमन कब तक मोर महिमा के बेजत्ती करत रहिहू?

3तुमन जान लव कि यहोवा ह अपन बिसवासयोग्य सेवक ला अपन बर अलग रखे हवय;

4कांपत रहव अऊ+ 4:4 या गुस्सा होके* पाप झन करव;

5धरमीपन के बलिदान चघावव

6बहुंते जन पुछत हवंय, “कोन ह हमर उन्नति करही?”

7जब ओमन के अनाज अऊ नवां अंगूर के मंद बहुंत होथे,

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